विवादों के बीच टी-20 बादशाहत की जंग

विवादों के बीच टी-20 बादशाहत की जंग

राज कुमार सिंह

By : Swadesh Bhopal
विवादों के बीच टी-20 बादशाहत की जंग

सात फरवरी से आठ मार्च तक होने जा रहे टी-20 क्रिकेट वल्र्डकप पर विवादों का साया गहराता जा रहा है। आईपीएल से अपने खिलाड़ी मुस्तफिजुर रहमान के बाहर हो जाने से शुरू विवाद के चलते बांग्लादेश इस विश्वकप का बहिष्कार कर चुका है। बांग्लादेश की जगह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) ने स्कॉटलैंड को वल्र्डकप में शामिल किया है। बांग्लादेश ने सुरक्षा कारणों का बहाना बनाते हुए अपने मैच भारत से श्रीलंका स्थानांतरित करने का अनुरोध किया था, जिसे आईसीसी ने ठुकरा दिया।

इस विवाद में बांग्लादेश के पक्ष में मुखरता के चलते पाकिस्तान द्वारा भी वल्र्डकप के बहिष्कार की आशंका थी, लेकिन उसने सिर्फ भारत के विरुद्ध मैच खेलने से इनकार किया है। भारत-श्रीलंका की मेजबानी में आयोजित हो रहे इस विश्वकप के ग्रुप 'ए' में भारत-पाकिस्तान के बीच यह मैच 15 फरवरी की खेला जाना है। इससे पहले पाकिस्तान को सात फरवरी को नीदरलैंड, 10 फरवरी को अमेरिका और 18 फरवरी को नामीबिया से मैच खेलने हैं। पाकिस्तान अपने ये सभी मैच खेलेगा। फिर भी भारत के विरुद्ध मैच न खेलने से उसे ग्रुप स्टेज पर ही विश्वकप से बाहर होना पड़ सकता है, क्योंकि भारत के विरुद्ध मैच न खेलने से पाकिस्तान का रन रेट खराब हो जाएगा। आईसीसी के नियम 16.10.7 के मुताबिक मैच न खेलने पर पाकिस्तान के 20 ओवर में ० रन माने जाएंगे, जबकि भारत का एक भी ओवर नहीं गिना जाएगा। परिणामस्वरूप बाकी सभी मैच जीत कर भी पाकिस्तान का रन रेट नकारात्मक हो सकता है।

हालांकि ग्रुप 'ए' में भारतऔर पाकिस्तान के अलावा अमेरिका, नामीबिया और नीदरलैंड जैसी कमजोर टीमें ही हैं, लेकिन क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है। पिछले वर्ल्डकप में अमेरिका तो पाकिस्तान को हरा कर ग्रुप स्टेज पर बार कर भी चुका है। नीदरलैंड भी अतीत में आईसीसी टूनमिंट में उलटफेर कर चुका है। अगर पाकिस्तान अपने इन तीन मैचों में से एक भी सार गया तो उसे ग्रुप स्टेज पर ही वर्ल्डकप से बाहर का रास्ता देखना पड़ सकता है। बेशक आईसीसी ने पाकिस्तान से भारत के विरुद्ध मैच न खेलने के फैसले पर पुनर्विचार का आग्रह किया है, लेकिन खुद वहां के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ कह चुके हैं कि फैसला सोच-समाझ कर किया गया है। वैसे कुछ जानकार पाकिस्तान के इस बांग्लादेश प्रेम को वहां के चुनाव से जोड़ कर भी देख रहे हैं। बांग्लादेश में 12 फरवरी को चुनाव हैं।

एक संभावना यह भी जताई जा रही है कि चुनाव में वहां के कट्टरपंथियों को खुश करने के बाद पाकिस्तान सायद भारत से 15 फरवरी का मैच खेलने पर मान जाए। अगर वह नहीं माना तो ग्रुप स्टेज पर ही बल्र्ल्डकप से बाहर होने के खतरे के आलावा दंडात्मक कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है। आईसीसी बहिष्कार का कारण पूछेगा। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) का जवाब संतोषजनक नहीं लगा तो उसे इस वर्ल्डकप से चैन भी किया जा सकता है। पाकिस्तान सुपर लीग (पीएसएल) के लिए विदेशी खिलाड़ियों को एनओसी मिलना तो मुश्किल होगा ही, उसे भविष्य में आईसीसी टूर्नामेंट की मेजबानी से भी वंचित होना पड़ सकता है। भारत-पाकिस्तान मैच न होने से ब्रॉडकास्टर जियो और आईसीसी की आय में होने वाली कमी की भरपाई के लिए भी पाकिस्तान को कहा जा सकता है। सबसे ज्यादा पैसा भारत-पाकिस्तान के बीच खखेले जाने वाले मैचों पर ही बरसता है।

वैसे यह पहली बार नहीं है, जब किसी क्रिकेट कर्ल्डकप पर विवाद और बहिष्कार का साया पड़ रहा है। भारतीय उपमहाद्वीप में आयोजित 1996 के वर्ल्डकप मेंश्रीलंका में जारी हिंसा के चलते ऑस्ट्रेलिया ने कोलंबो में मैच खेलने से इनकार कर दिया था। श्रीलंका को वॉकओवर मिल गया। उसी वर्ल्डकप में वेस्टइंडीज ने भी श्रीलंका में खेलने से इनकार कर दिया था। परिणामस्वरूप श्रीलंका को एक और वॉकओवर मिल गया। दो बड़ी टीमों के विरुद्ध मिले वॉकओवर से श्रीलंका की किस्मत ऐसी चमकी कि वह लाहौर में फाइनल जीत कर विश्व विजेता बन गया। 2003 में अफ्रीकी धरती पर खेले गए विश्वकप में, जिंबाब्वे में रॉबर्ट मुगाबे शासन पर ब्रिटिश सरकार की आपत्ति के चालते. इंगलैंड ने खेलने से इनकार कर दिया तो जिंबाब्वे को वॉकओवर मिला गया। उसी वर्ल्डकप में न्यूजीलैंड ने भी सुरक्षा कारणों से खेलने से इनकार किया तो केन्या को किओवर मिल गया और चमत्कारिक रूप से वह सेमीफाइनल में पहुंच गया। अगला विश्वकप ब्रिटेन में हुआ, जिससे जिंबाब्वे के राजनयिक रिश्ते खराब थे। बीजा संबंधी संकट खड़ा हुआ तो आईसीसी से समझौता कर जिब्बाब्वे वर्ल्डकप से हट गया और उसकी जगह स्कॉटलैंड को मौका मिला।

बेशक क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है. जिसमें कभी भी कोई भी टीम कमाल कर सकती है, लेकिन हालिया प्रदर्शन की बात करें तो इस टी-20 वल्र्डकप में सूर्य कुमार यादव के नेतृत्व में टीम इंडिया खिताब की प्रबल दावेदार है। हालांकि भारतीय टीम का पिछला साल अच्छा नहीं गुजरा। हाल में मेहमान न्यूजीलैंड टीम से वन डे श्रृंखला भी 0-3 से हार गयी, लेकिन उसके बाद टी-20 श्रृंखला 4-1 से जीत कर जैसी जबर्दस्त वापसी की, उसके बाद ज्यादातर जानकार मानते हैं टीम इंडिया को टी-20 वर्ल्डकप जीतने से रोक पाना आसान नहीं होगा। कसान सूर्या की फॉर्म लौट आई है तो ईशान किशन भी तूफानी बल्लेबाजी फॉर्म के साथ टीम में लौटे हैं। ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या अच्छी फॉर्म में हैं तो तेज गेंदबाजी आक्रमण किसी भी प्रतिद्वंद्वी टीम को धराशायी करने में समर्थ है यानि टीम इंडिया टी-20 वर्ल्डकप का पिछली बार जीता खिताब बरकरार रख सकती है।

बेशक सदावहार ऑस्ट्रेलिया, जुझारू दक्षिण अफ्रीका, गजब की पेशेवर न्यूजीलैंड और क्रिकेट के जनक इंगलैंड को कम आंकने की गलती कोई जानकार नहीं करना चाहेगा। अतीत में असाधारण प्रदर्शन से चौका चुकी ये टीमें भी खिताब की दावेदार हैं। चार सुपों में बटे विश्व कप में 20 टीमें मैदान में होंगी। हर ग्रुप में दो मजबूत टीमें रख कर स्पर्धा को रोमांचक और संतुलित बनाने की कोशिश की गयी है। ग्रुप 'ए' में भारत और पाकिस्तान मजबूत टीमें हैं तो ग्रुप 'बी' में ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका की बाबत ऐसा कहा जा सकता है। ग्रुप 'सी' में इंग्लैंड और वेस्टइंडीज को मजबूत माना जा सकता है, जबकि ग्रुप 'डी' में न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका उसी श्रेणी में आती है। घरेलू पिचों का लाभ भारत और श्रीलंका को मिलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन आईपीएल के खलते अन्य देशों के खिलाड़ी भी अब भारतीय पिचों से अनजान नहीं रह गए हैं। इसलिए टी-20 वल्र्डकप की नई चैंपियन बड़ी टीम होगी, जो सुनियोजित रणनीति के साथ मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेगी।

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