टूथब्रश और टंग क्लीनर कब बदलना चाहिए?

जान लें पुराना टूथब्रश और टंग क्लीनर कब बदलें? नहीं तो बॉडी बन जाएगी बीमारियों का घर

पुराना टूथब्रश और टंग क्लीनर कब बदलना चाहिए, और अगर सही समय पर नहीं बदला तो क्या होगा?

By : सपना तंवर
जान लें पुराना टूथब्रश और टंग क्लीनर कब बदलें? नहीं तो बॉडी बन जाएगी बीमारियों का घर

पुराना टूथब्रश और टंग क्लीनर सिर्फ पुराने दिखते ही नहीं, बल्कि यह आपकी सेहत के लिए भी खतरा बन सकते हैं। इसलिए इन्हें समय पर बदलते रहना चाहिए। लेकिन क्या आपको यह नहीं पता कि टूथब्रश और टंग क्लीनर को कब बदलना चाहिए।तो कोई परेशानी की बात नहीं है। इस आर्टिकल में हम आपको बताते है टूथब्रश और टंग क्लीनर को कब बदलना चाहिए, इसका सही समय क्या है?    

टूथब्रश बदलने का सही समय

टूथब्रश हमारी रोज़ाना की हेल्थ रूटीन का अहम हिस्सा है, लेकिन ज्यादातर लोग यह भूल जाते हैं कि ब्रश का भी एक “लिमिटेड टाइम” होता है। अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन (ADA) के अनुसार, नियमित इस्तेमाल के 3–4 महीने बाद ब्रश के ब्रिसल्स फैलने और मुड़ने लगते हैं। जब ब्रिसल्स अपनी सीध खो देते हैं, तो यह दांतों के कोनों और मसूड़ों से प्लाक हटाने में असफल हो जाते हैं। इसके अलावा पुराने ब्रश पर स्टैफिलोकोकस और ई-कोलाई जैसे बैक्टीरिया जम सकते हैं, जो नमी और बंद जगह में तेजी से बढ़ते हैं।

इसलिए सामान्य इस्तेमाल में ब्रश को हर 3 महीने में बदलना चाहिए। वहीं, फ्लू, वायरल बुखार या कोविड जैसी बीमारी के बाद तुरंत नया ब्रश लेना और इस्तेमाल करना जरूरी है।

टंग क्लीनर कब बदलें

टंग क्लीनर भी ओरल हाइजीन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह जीभ पर जमा सफेद परत और बैक्टीरिया हटाने में मदद करता है। लेकिन अगर यह गंदा या पुराना हो जाए तो मुंह की बदबू और संक्रमण (Infection) का खतरा बढ़ जाता है। प्लास्टिक टंग क्लीनर को हर 2–3 महीने में बदलना चाहिए, जबकि स्टील या तांबे के क्लीनर लंबे समय तक चलते हैं। इन्हें रोज़ गर्म पानी से धोना चाहिए और अगर जंग, कालापन या खुरदरापन दिखे तो तुरंत बदल देना चाहिए।

ब्राजीलियन ओरल रिसर्च (साओ पाउलो विश्वविद्यालय) की स्टडी के अनुसार, टंग क्लीनर का इस्तेमाल टूथब्रश से ज्यादा प्रभावी है। इससे सांसों की बदबू में लगभग 75% सुधार होता है, जबकि टूथब्रश से सिर्फ 45% सुधार होता है।

पुराने ब्रश और क्लीनर के खतरे

पुराना टूथब्रश और गंदा टंग क्लीनर केवल मुंह तक ही सीमित असर नहीं डालते। घिसे हुए ब्रिसल्स मसूड़ों में जख्म और सूजन पैदा कर सकते हैं। मुंह के खराब बैक्टीरिया खून में जाकर दिल तक पहुंच सकते हैं और लगातार बदबू भी बनी रहती है।

इसलिए विशेषज्ञों की सलाह है कि टूथब्रश को हर 3 महीने में बदलें, बीमारी के बाद तुरंत नया ब्रश इस्तेमाल करें, प्लास्टिक टंग क्लीनर 2–3 महीने में बदलें और मेटल क्लीनर में जंग या खुरदरापन दिखे तो बदल दें। साफ-सुथरा ब्रश और टंग क्लीनर न सिर्फ मुंह को स्वस्थ रखते हैं, बल्कि पूरे शरीर की सेहत पर भी सकारात्मक असर डालते हैं।

 

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