मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध तनाव का असर अब भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखने लगा है। 23 मार्च को BSE Sensex करीब 1,800 अंक टूटकर 72,700 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि Nifty 50 भी 550 अंक गिरकर 22,650 पर कारोबार करता नजर आयाबाजार में आज व्यापक बिकवाली देखने को मिली और सेंसेक्स के सभी 30 शेयर लाल निशान में बंद होते दिखे।
मिडिल ईस्ट जंग बना सबसे बड़ा कारण
विशेषज्ञों के मुताबिक, ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है।इस टकराव से कच्चे तेल की सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका है, जिससे ऊर्जा कीमतों में तेजी आई है। यही वजह है कि निवेशकों ने जोखिम भरे एसेट्स से दूरी बनानी शुरू कर दी है।
कच्चे तेल में उछाल से बढ़ी चिंता
युद्ध के चलते ब्रेंट क्रूड की कीमतें 108 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है।तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने और कंपनियों की लागत में इजाफा होने की आशंका है, जिससे शेयर बाजार पर दबाव बढ़ता है।
इन सेक्टर्स में सबसे ज्यादा गिरावट
आज बैंकिंग, ऑटो, FMCG और IT सेक्टर में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली। निवेशकों ने इन सेक्टर्स में मुनाफावसूली की, जिससे बड़े शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई।
वैश्विक बाजारों का भी दबाव
एशियाई और अमेरिकी बाजारों में पहले से ही कमजोरी देखी जा रही थी, जिसका असर भारतीय बाजार पर पड़ा। Dow Jones Industrial Average और Nasdaq Composite में गिरावट, एशिया के प्रमुख सूचकांकों में भी कमजोरी इस वैश्विक दबाव ने भारतीय निवेशकों की धारणा को और कमजोर कर दिया।
रुपया भी हुआ कमजोर
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया गिरकर 93.86 के स्तर पर पहुंच गया। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितता के चलते रुपये पर दबाव बना हुआ है।
FIIs की बिकवाली जारी
विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। मार्च में अब तक भारी निकासी दर्ज की गई है, जिससे बाजार में गिरावट और तेज हो गई है।
निवेशकों के लिए संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मिडिल ईस्ट में तनाव कम नहीं होता, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।ऊर्जा कीमतों, वैश्विक संकेतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर आने वाले दिनों में बाजार की दिशा निर्भर करेगी।