ट्रम्प टैरिफ पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैस

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प के टैरिफ रद्द किए, भारत को बड़ी राहत

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प के ग्लोबल टैरिफ को असंवैधानिक बताया। भारत पर लगा 18% शुल्क भी रद्द हुआ, रिफंड पर सस्पेंस कायम।

By : संजय चतुर्वेदी
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प के टैरिफ रद्द किए, भारत को बड़ी राहत

अमेरिका की सर्वोच्च अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्लोबल टैरिफ नीति को बड़ा झटका देते हुए उसे अवैध करार दिया है। शुक्रवार को आए फैसले में अदालत ने साफ कहा कि राष्ट्रपति को एकतरफा टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है और वैश्विक टैरिफ को रद्द कर दिया। साथ ही अदालत ने साफ कहा कि दूसरे देशों पर लगाए गए ये आयात शुल्क कानून के दायरे में नहीं आते। इसके साथ ही भारत पर लगाया गया 18% रेसिप्रोकल टैरिफ भी अमान्य घोषित हो गया।

6-3 के बहुमत से ऐतिहासिक फैसला

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से निर्णय सुनाते हुए कहा कि संविधान के तहत टैक्स और टैरिफ लगाने की शक्ति केवल कांग्रेस के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास। अदालत का यह रुख ट्रम्प प्रशासन की आर्थिक नीतियों के लिए गंभीर झटका माना जा रहा है।

ट्रम्प ने सुनवाई के दौरान कहा था कि यदि वे यह मामला हार गए तो देश को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। बावजूद इसके, अदालत ने संवैधानिक प्रावधानों को प्राथमिकता दी।

किन टैरिफ पर लगी रोक, क्या रहेगा लागू

कोर्ट के फैसले के बाद सभी टैरिफ समाप्त नहीं होंगे। स्टील और एल्युमिनियम पर लगाए गए शुल्क अन्य कानूनों के तहत लागू किए गए थे, इसलिए वे फिलहाल जारी रहेंगे।

हालांकि दो प्रमुख श्रेणियों पर रोक लगी है। इसमें से पहली रेसिप्रोकल टैरिफ है। इसमें चीन पर 34% और अन्य देशों पर 10% बेसलाइन टैरिफ शामिल था। दूसरी, कनाडा, चीन और मैक्सिको से आने वाले कुछ उत्पादों पर लगाया गया 25% टैरिफ, जिसे प्रशासन ने फेंटेनाइल तस्करी रोकने के तर्क पर लागू किया था। अदालत ने इन दोनों को निरस्त कर दिया।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अमेरिका दुनिया के हर देश के साथ युद्ध जैसी स्थिति में नहीं है। हालांकि तीन जजों जस्टिस सैमुअल एलिटो, क्लेरेंस थॉमस और ब्रेट कैवनॉ ने असहमति जताई। कैवनॉ ने कहा कि नीति की समझदारी अलग मुद्दा है, लेकिन उनके अनुसार यह कानूनी रूप से वैध थी।

200 अरब डॉलर वसूली, रिफंड पर संशय

टैरिफ लागू होने के बाद से ट्रम्प प्रशासन 200 अरब डॉलर से अधिक वसूल चुका है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह रकम कंपनियों को लौटानी पड़ेगी। फिलहाल इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। कई कंपनियों ने पहले ही रिफंड के दावे दाखिल कर रखे हैं।

IEEPA कानून बना विवाद की जड़

टैरिफ लगाने के लिए ट्रम्प ने 1977 में बने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का सहारा लिया था। इस कानून के तहत असाधारण अंतरराष्ट्रीय संकट की स्थिति में राष्ट्रपति को विशेष आर्थिक अधिकार दिए जाते हैं। अदालत ने माना कि इस प्रावधान के दायरे में टैरिफ लगाना वैध नहीं था।

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