नक्सल प्रभावित जिलों में निर्माण कार्यों के लिए बनेगी जिला निर्माण समिति

CM Vishnu Deo Sai Cabinet Expansion
District Construction Committee in Naxal Affected Districts : रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नक्सल प्रभावित सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर जिलों में विकास कार्यों को गति देने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने इन जिलों में "जिला निर्माण समिति" के गठन को मंजूरी दे दी है। सीएम साय ने साफ तौर पर कहा कि भ्रष्टाचार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जनता के पैसे से होने वाले कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। इस दिशा में सामान्य प्रशासन विभाग ने जिला निर्माण समिति के गठन के लिए औपचारिक आदेश जारी कर दिया है।
जिला निर्माण समिति की भूमिका
मुख्यमंत्री ने बताया कि यह समिति निर्माण कार्यों के बेहतर क्रियान्वयन, निगरानी और मूल्यांकन के लिए बनाई गई है। समिति के अध्यक्ष जिला कलेक्टर होंगे, जबकि जिले के पुलिस अधीक्षक, सीईओ जिला पंचायत, डीएफओ, लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री, जिला कोषालय अधिकारी और संबंधित कार्य के जिला प्रमुख अधिकारी इसके सदस्य होंगे। समिति का कार्यक्षेत्र संपूर्ण राजस्व जिला होगा। जिला कलेक्टर द्वारा समिति के माध्यम से किए जाने वाले कार्यों का निर्धारण किया जाएगा।
कार्यों का आवंटन और नियम
जिन कार्यों को तीन बार ऑनलाइन निविदा आमंत्रित करने के बाद भी ठेकेदार नहीं मिलते, ऐसे अत्यावश्यक और अपरिहार्य निर्माण कार्यों को जिला निर्माण समिति के जरिए पूरा कराया जाएगा। हालांकि, जिन ब्लॉकों में नक्सल प्रभाव गहन नहीं है, वहां समिति के माध्यम से यथासंभव कार्य नहीं कराए जाएंगे। डीएमएफ/सीएसआर जैसी स्थानीय निधि से होने वाले कार्यों में प्राथमिकता पीडब्लूडी, आरईएस, या पीएमजीएसवाई जैसी कार्य एजेंसियों को दी जाएगी। अगर ये एजेंसियां कार्य निष्पादन नहीं कर पातीं और लगातार तीन बार निविदा में कोई भाग नहीं लेता, तभी जिला निर्माण समिति को क्रियान्वयन एजेंसी बनाया जाएगा।
10 करोड़ तक के कार्य संभव
जिला निर्माण समिति के माध्यम से अधिकतम 10 करोड़ रुपये तक के कार्य कराए जा सकेंगे। अपरिहार्य और अत्यावश्यक निर्माण कार्यों के लिए ई-टेंडर के जरिए निविदा आमंत्रित की जाएगी। समिति को यह छूट होगी कि वह एक कार्य को दो या अधिक भागों में बांट सके। उदाहरण के लिए, सड़क और पुल-पुलिया के कार्य को अलग-अलग ठेकेदारों को सौंपा जा सकता है। सड़क की लंबाई या पुल-पुलियों की संख्या अधिक होने पर भी अलग-अलग एजेंसियां नियुक्त की जा सकती हैं। हालांकि, समिति को यह सुनिश्चित करना होगा कि कार्य की गुणवत्ता एकसमान रहे और लागत में समानता बनी रहे। कार्य की दरें पिछले तीन वर्षों में जिले में हुए समान कार्यों की दरों से अधिक नहीं होनी चाहिए।
निर्माण कार्यों का निरीक्षण, पर्यवेक्षण और मूल्यांकन लोक निर्माण विभाग या जिला कलेक्टर द्वारा नियुक्त किसी सक्षम तकनीकी अधिकारी द्वारा किया जाएगा। निविदा स्वीकार करने से पहले प्राधिकारी को दरों की उचितता की जांच करनी होगी। इसके लिए पिछले तीन महीनों में समान प्रकृति के कार्यों की दरों का उल्लेख किया जा सकता है। दरों की उचितता का आकलन बाजार दरों, श्रम, सामग्री और माल ढुलाई के आधार पर किया जाएगा। इसके लिए एक विस्तृत औचित्य कथन भी तैयार किया जाएगा।
पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर सख्ती
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह पहल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास को गति देने के साथ-साथ भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार करेगी। जिला निर्माण समिति के गठन से पारदर्शिता को एक संस्थागत ढांचा मिलेगा। यह समिति न केवल प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाएगी, बल्कि जनता के हित में कार्यों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा करने में भी मदद करेगी। सीएम ने कहा कि राज्य सरकार विकास, विश्वास और पारदर्शिता के सिद्धांतों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है, और यह कदम उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
क्यों है जरूरी
सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर जैसे नक्सल प्रभावित जिलों में विकास कार्यों को गति देने के लिए यह समिति एक नई उम्मीद लेकर आई है। इन क्षेत्रों में सड़क, पुल, स्कूल और अस्पताल जैसे बुनियादी ढांचे के निर्माण में अक्सर नक्सल गतिविधियों के कारण बाधाएं आती हैं। जिला निर्माण समिति के गठन से इन कार्यों को तेजी से पूरा करने में मदद मिलेगी, जिससे स्थानीय लोगों का जीवन स्तर सुधरेगा और नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में भी सहायता मिलेगी।