अनुराग तागड़े, इंदौर। जिस रामकथा ने हजारों वर्षों से भारत की आत्मा को दिशा दी, जिसने दक्षिण-पूर्व एशिया की सभ्यताओं को संस्कार दिए और जो आज भी करोड़ों लोगों के जीवन का नैतिक आधार है। वही 'रामायण' अब विश्व के सबसे बड़े सिनेमाई मंचों पर भारत की सांस्कृतिक शक्ति का प्रतिनिधित्व करने जा रही है। यह केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता के वैश्विक पुनर्परिचय का वह क्षण है, जिसका इंतजार केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में फैले करोड़ों भारतीय और रामकथा से जुड़े लोग कर रहे हैं। निर्देशक नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'रामायण' ने रिलीज से कई महीने पहले ही विश्वभर में जिस प्रकार का वातावरण बनाया है, वह भारतीय सिनेमा के इतिहास में अभूतपूर्व माना जा रहा है। अमेरिका के प्रतिष्ठित सैन डिएगो कॉमिक-कॉन में इसकी विशेष प्रस्तुति, आईमैक्स थिएटरों में इसकी पहली झलक, और विश्वव्यापी वितरण के लिए वॉर्नर ब्रदर्स का जुड़ना इस बात का संकेत है कि भारत पहली बार अपनी सबसे महान सांस्कृतिक कथा को हॉलीवुड स्तर की वैश्विक प्रस्तुति देने जा रहा है।
निर्माता नमित मल्होत्रा के नेतृत्व में बन रही यह फिल्म केवल बजट या तकनीक के कारण नहीं, बल्कि अपने विशाल वैश्विक स्वरूप के कारण भी चर्चा में है। इस महाप्रकल्प में विश्व के 10,000 से अधिक कलाकार, तकनीकी विशेषज्ञ, विजुअल इफेक्ट्स इंजीनियर, एनीमेशन विशेषज्ञ, स्टंट डिज़ाइनर, कॉस्ट्यूम आर्टिस्ट, सेट डिज़ाइनर, डिजिटल कलाकार और पोस्ट-प्रोडक्शन विशेषज्ञ भारत सहित अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, न्यूजीलैंड और यूरोप के अनेक देशों से जुड़े हैं। भारतीय सिनेमा के इतिहास में शायद पहली बार किसी पौराणिक कथा पर इतना विशाल अंतरराष्ट्रीय तकनीकी सहयोग देखने को मिल रहा है।
दो भागों में विश्व के सामने आएगी रामकथा
निर्माताओं ने इस महागाथा को दो भागों में प्रस्तुत करने का निर्णय लिया है।'रामायण : पार्ट-1' दिवाली 2026 पर विश्वभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी, जबकि 'रामायण : पार्ट-2' दिवाली 2027 में प्रदर्शित की जाएगी। फिल्म को भारत सहित अनेक देशों में एक साथ रिलीज करने की तैयारी है, जिससे भारतीय पौराणिक कथा पहली बार वैश्विक ब्लॉकबस्टर के रूप में दुनिया के सामने आएगी।
सितारों से सजी सबसे बड़ी भारतीय सिनेमाई टीम
फिल्म में रणबीर कपूर भगवान श्रीराम, साई पल्लवी माता सीता, यश रावण, सनी देओल भगवान हनुमान, रवि दुबे लक्ष्मण तथा अरुण गोविल राजा दशरथ की भूमिका निभा रहे हैं। निर्देशन की कमान राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक नितेश तिवारी के हाथों में है, जबकि निर्माण प्राइम फोकस स्टूडियोज़ और यश की मॉन्स्टर माइंड क्रिएशंस द्वारा किया जा रहा है।फिल्म की तकनीकी टीम भी किसी हॉलीवुड महाप्रकल्प से कम नहीं है। विश्वस्तरीय विजुअल इफेक्ट्स, वर्चुअल प्रोडक्शन, डिजिटल वर्ल्ड बिल्डिंग और सिनेमैटिक तकनीकों पर वर्षों से काम कर रहे विशेषज्ञ इस परियोजना से जुड़े हैं। यही कारण है कि इसे भारतीय सिनेमा की अब तक की सबसे तकनीकी रूप से उन्नत फिल्म माना जा रहा है।
जब एआर रहमान और हांस ज़िमर साथ आए
फिल्म का संगीत भी इतिहास रचने वाला है।भारतीय संगीत के ऑस्कर विजेता ए. आर. रहमान और हॉलीवुड के दिग्गज संगीतकार हांस ज़िमर पहली बार किसी भारतीय महाकाव्य के लिए साथ काम कर रहे हैं। भारतीय शास्त्रीय संगीत, वैदिक मंत्रों की ध्वनि और विश्वस्तरीय ऑर्केस्ट्रा का यह संगम 'रामायण' को केवल दृश्य नहीं, बल्कि श्रव्य दृष्टि से भी विश्वस्तरीय अनुभव बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
रामायण... दुनिया का सबसे अधिक जीवित महाकाव्य
दुनिया में शायद ही कोई दूसरा ऐसा महाकाव्य होगा, जो लगभग ढाई हजार वर्षों से लगातार नए रूपों में लिखा, बोला, गाया और मंचित होता रहा हो।महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित मूल रामायण से प्रारंभ हुई यह यात्रा आज 300 से अधिक ज्ञात रामायणों तक पहुँच चुकी है। भारतीय भाषाओं, लोक परंपराओं, जैन, बौद्ध तथा दक्षिण-पूर्व एशियाई संस्कृतियों में रामकथा के इतने विविध रूप मिलते हैं कि विद्वान इसे विश्व की सबसे अधिक जीवित और विकसित होती सांस्कृतिक परंपरा मानते हैं।भारत में रामचरितमानस, कंब रामायण, कृतिवासी रामायण, तेलुगु, मलयालम, उड़िया, असमिया, मराठी, कन्नड़ और संस्कृत सहित लगभग हर प्रमुख भाषा में रामायण की अपनी समृद्ध परंपरा है।
भारत से निकली कथा, आधे एशिया की सांस्कृतिक पहचान बनी
रामायण का प्रभाव भारत की सीमाओं से बहुत आगे तक फैला हुआ है।थाईलैंड की राष्ट्रीय रामकथा रामाकियन, कंबोडिया का रीमकेर, इंडोनेशिया की काकाविन रामायण, लाओस की फ्रा लक फ्रा लाम, म्यांमार की यामा जातदॉ, मलेशिया की हिकायत सेरी रामा और फिलीपींस तक में रामकथा के स्थानीय स्वरूप आज भी जीवंत हैं।विश्व के सबसे बड़े मुस्लिम बहुल देश इंडोनेशिया में आज भी प्रांबनन मंदिर परिसर में रामायण बैले का नियमित मंचन होता है, जबकि कंबोडिया के अंगकोरवाट मंदिर की दीवारों पर रामायण के दृश्य पत्थरों में अंकित हैं। यह केवल धार्मिक प्रभाव नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की हजारों वर्षों पुरानी वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है।
रामलीला से आईमैक्स तक की ऐतिहासिक यात्रा
एक समय था जब गांवों की चौपालों पर मिट्टी के मंचों पर रामलीला होती थी।फिर मंदिरों में कथा हुई।लोकगीतों में राम गाए गए।दूरदर्शन पर रामानंद सागर की रामायण ने पूरे देश को एक सूत्र में बांध दिया।आज वही कथा विश्व के सबसे बड़े आईमैक्स पर्दों तक पहुंच चुकी है।अमेरिका में जब आईमैक्स स्क्रीन पर 'रामायण' का शीर्षक उभरा तो भारतीय मूल के दर्शकों ने खड़े होकर तालियां बजाईं। सोशल मीडिया पर हजारों लोगों ने इसे "गूजबम्प्स मोमेंट", "भारतीय होने का गर्व" और "ऐतिहासिक क्षण" बताया।
कॉमिक-कॉन में पहली बार भारतीय सभ्यता की दस्तक
सैन डिएगो कॉमिक-कॉन केवल एक फिल्म महोत्सव नहीं, बल्कि विश्व मनोरंजन उद्योग का सबसे प्रतिष्ठित मंच माना जाता है।यहीं से मार्वल, डीसी, स्टार वार्स, अवतार और अनेक हॉलीवुड ब्लॉकबस्टर फिल्मों ने दुनिया के सामने अपनी पहली झलक प्रस्तुत की है।अब पहली बार भारत की सबसे बड़ी सांस्कृतिक कथा उसी मंच पर सम्मानपूर्वक प्रस्तुत हो रही है। यह केवल फिल्म का प्रचार नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता के आत्मविश्वास की उद्घोषणा है।