AIIMS Bhopal Nasopharynx Gland Discovery

एम्स भोपाल की बड़ी खोज: नासाग्रसनी में नई ग्रंथि की पहचान, सर्जरी और कैंसर इलाज में मिलेगी मदद

एम्स भोपाल ने नासाग्रसनी क्षेत्र में नई ग्रंथि और उसकी डक्ट की पहचान की। जर्नल ऑफ एनाटॉमी में प्रकाशित शोध से सिर-गर्दन सर्जरी, कैंसर इलाज और रेडियोथेरेपी में सटीकता बढ़ेगी।

By : स्वदेश डेस्क
एम्स भोपाल की बड़ी खोज: नासाग्रसनी में नई ग्रंथि की पहचान, सर्जरी और कैंसर इलाज में मिलेगी मदद

भोपाल। मानव शरीर के बारे में हम बहुत कुछ जान चुके हैं ऐसा अक्सर कहा जाता है। लेकिन विज्ञान की दुनिया में ‘अभी बहुत कुछ बाकी है’ यह बात फिर साबित हुई है। भोपाल स्थित एम्स के डॉक्टरों और शोधकर्ताओं ने गले के ऊपरी हिस्से, यानी नासाग्रसनी (नासोफैरिंक्स) क्षेत्र में एक खास ग्रंथि की पहचान की है, जिसके बारे में अब तक स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं थी। इतना ही नहीं, इस ग्रंथि से निकलने वाली नलिका (डक्ट) को भी शोध टीम ने स्पष्ट रूप से चिन्हित किया है। चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में इसे अहम उपलब्धि माना जा रहा है। 

क्या है यह नई खोज?

AIIMS Bhopal के शोधकर्ताओं ने विस्तृत अध्ययन के बाद यह साबित किया कि नाक के पीछे और गले के ऊपरी हिस्से में मौजूद यह संरचना एक स्वतंत्र ग्रंथि है। शोध के दौरान ग्रंथि की स्थिति, आकार, आसपास के अंगों से संबंध और उसकी संरचनात्मक विशेषताओं का सूक्ष्म विश्लेषण किया गया। वैज्ञानिक पुष्टि के बाद ही इसे सार्वजनिक किया गया।चिकित्सकों के अनुसार, पहले इस क्षेत्र को लेकर कई तरह की धारणाएं थीं लेकिन स्पष्ट एनाटॉमिकल पहचान नहीं थी। अब तस्वीर ज्यादा साफ है।

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अंतरराष्ट्रीय पत्रिका में प्रकाशित शोध

इस खोज को वैश्विक स्तर पर भी मान्यता मिली है। शोध प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल Journal of Anatomy में विशेषज्ञों की गहन समीक्षा (पीयर रिव्यू) के बाद प्रकाशित हुआ है।किसी भी मेडिकल रिसर्च के लिए यह एक बड़ी कसौटी मानी जाती है। इसका मतलब है कि अध्ययन को अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय ने परखा और स्वीकार किया।

सिर और गर्दन की सर्जरी में मिलेगा लाभ

नाक और गले के इस जटिल हिस्से की बेहतर समझ से सिर और गर्दन की सर्जरी अब और अधिक सुरक्षित तरीके से की जा सकेगी। कई बार ऑपरेशन के दौरान सूक्ष्म संरचनाएं स्पष्ट न होने से जोखिम बढ़ जाता है। यह खोज उस जोखिम को कम करने में सहायक हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस नई जानकारी से कैंसर उपचार और रेडियोथेरेपी की योजना बनाने में भी सटीकता आएगी। रेडिएशन देते समय आसपास के स्वस्थ ऊतकों को बचाना बेहद जरूरी होता है। नई ग्रंथि की स्पष्ट पहचान से उपचार की योजना और बेहतर बनेगी। मेडिकल इमेजिंग जैसे सीटी स्कैन, एमआरआई में भी अब इस क्षेत्र की व्याख्या ज्यादा स्पष्ट रूप से की जा सकेगी। इससे रोगों की पहचान समय पर और सही ढंग से होने की संभावना बढ़ेगी। 

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