AIIMS Bhopal के चिकित्सकों द्वारा किए गए एक महत्वपूर्ण शोध को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। इस अध्ययन में धूम्रपान और पुरुष बांझपन के बीच गहरे संबंध को उजागर किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर पेश हुआ शोध
यह शोध अमेरिका में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रस्तुत किया गया, जहां इसे विशेषज्ञों द्वारा सराहा गया। अध्ययन में पुरुष प्रजनन क्षमता की सटीक जांच के लिए नई तकनीकों पर जोर दिया गया।
DNA फ्रैगमेंटेशन जांच पर फोकस
शोध में “DNA फ्रैगमेंटेशन इंडेक्स” को पुरुष बांझपन की जांच के लिए एक महत्वपूर्ण पैरामीटर बताया गया है। यह ऐसी जांच है, जो सामान्य परीक्षणों में सामने नहीं आती। विशेषज्ञों के अनुसार, जिन पुरुषों में DNA फ्रैगमेंटेशन का स्तर 30% से अधिक होता है, उनमें शुक्राणुओं की गुणवत्ता प्रभावित होती है, जिससे गर्भधारण की संभावना कम हो जाती है।
धूम्रपान से बढ़ती समस्या
अध्ययन में पाया गया कि धूम्रपान करने वाले पुरुषों में यह समस्या अधिक देखी जाती है। इसका मुख्य कारण ऑक्सीडेटिव तनाव है, जो शुक्राणुओं को नुकसान पहुंचाता है। डॉक्टरों का कहना है कि धूम्रपान न केवल फेफड़ों बल्कि प्रजनन स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव डालता है।
विशेषज्ञों की टीम का योगदान
इस शोध में एम्स भोपाल के कई विशेषज्ञों ने योगदान दिया। इसमें पैथोलॉजी और प्रयोगशाला चिकित्सा विभाग की टीम शामिल रही, जिसने विस्तृत अध्ययन कर यह निष्कर्ष निकाला।
यह शोध पुरुष बांझपन की जांच को अधिक सटीक और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे भविष्य में इलाज के बेहतर विकल्प विकसित करने में भी मदद मिल सकती है।