नई दिल्ली। दिल्ली ब्लास्ट केस के बाद चर्चा में आई अल-फलाह यूनिवर्सिटी एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है, जिसमें अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन Jawad Ahmad Siddiqui को कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
ED कस्टडी के बाद कोर्ट का फैसला
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कस्टडी खत्म होने के बाद सिद्दीकी को अदालत में पेश किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने उन्हें 17 अप्रैल तक जेल भेजने का आदेश दिया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह मामला दिल्ली के मदनपुर खादर इलाके में स्थित करीब 1.14 एकड़ जमीन से जुड़ा है, जिसकी बाजार कीमत लगभग ₹45 करोड़ बताई जा रही है। आरोप है कि इस जमीन को फर्जी दस्तावेजों के जरिए मात्र ₹75 लाख में दिखाकर कब्जा किया गया।
साजिश और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल
ED का दावा है कि इस पूरे मामले में सुनियोजित साजिश के तहत नकली दस्तावेज तैयार किए गए और जमीन हथियाने की कोशिश की गई। जांच में यह भी सामने आया है कि इस प्रक्रिया में कई अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। जवाद सिद्दीकी इससे पहले भी विवादों में रह चुके हैं। नवंबर 2025 में ED ने उन्हें छात्रों के साथ कथित धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया था। आरोप है कि यूनिवर्सिटी ने 2018 से 2025 के बीच बड़ी रकम जुटाई और उसका दुरुपयोग किया।
मान्यता को लेकर भी उठे सवाल
यूनिवर्सिटी पर NAAC और UGC की मान्यता को लेकर भ्रामक जानकारी देने के आरोप भी लगे हैं। इससे छात्रों के साथ धोखाधड़ी की आशंका जताई गई है। फिलहाल जांच एजेंसियां मामले की गहराई से पड़ताल कर रही हैं और आने वाले दिनों में इस केस में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।