बांग्लादेश में राम प्रतिमा पर विवाद

बांग्लादेश में श्रीराम प्रतिमा पर बवाल, हिंदुओं का मशाल मार्च; 72 घंटे का अल्टीमेटम 

बांग्लादेश में भगवान श्रीराम की प्रतिमा निर्माण के विरोध में हिंदुओं ने मशाल जुलूस निकाला। सरकार को 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया गया है।

By : नरेंद्र कुमार
बांग्लादेश में श्रीराम प्रतिमा पर बवाल, हिंदुओं का मशाल मार्च; 72 घंटे का अल्टीमेटम 

बांग्लादेश में भगवान श्रीराम की प्रस्तावित विशाल प्रतिमा परियोजना को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। राजधानी ढाका में शुक्रवार रात हजारों लोगों ने मशाल जुलूस निकालकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि गैबांधा जिले के पलाशबाड़ी क्षेत्र में चल रहे मंदिर परिसर निर्माण कार्य को कुछ कट्टरपंथी तत्वों के दबाव में रोक दिया गया और धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली घटनाएं हुईं।

राम प्रतिमा परियोजना को लेकर बढ़ा विवाद

जानकारी के अनुसार, उत्तरी बांग्लादेश के गैबांधा जिले के पलाशबाड़ी क्षेत्र में एक मंदिर परिसर का निर्माण किया जा रहा था। इस परियोजना में 81 फुट ऊंची भगवान श्रीराम की प्रतिमा के साथ 53 फुट ऊंची भगवान श्रीकृष्ण तथा 30 फुट ऊंची भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित करने की योजना थी।परियोजना की अनुमानित लागत करीब 22 करोड़ बांग्लादेशी टका बताई गई है और इसका निर्माण निजी फंडिंग के माध्यम से शुरू किया गया था। मंदिर समिति का दावा है कि निर्माण कार्य के दौरान कुछ समूहों की ओर से विरोध और धमकियों के बाद काम रोकना पड़ा।

ढाका में निकला मशाल जुलूस

विवाद के विरोध में विभिन्न हिंदू संगठनों और छात्रों ने ढाका में शाहबाग से नेशनल प्रेस क्लब तक मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने मामले में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई और परियोजना को पुनः शुरू कराने की मांग की।प्रदर्शन के दौरान धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों की सुरक्षा को लेकर भी आवाज उठाई गई। कुछ स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, रंगपुर क्षेत्र में एक छोटे प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हल्का तनाव भी देखने को मिला।

72 घंटे का अल्टीमेटम

हिंदू संगठनों ने सरकार को 72 घंटे के भीतर कार्रवाई करने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। संगठनों ने सरकार को ज्ञापन सौंपने और उच्च स्तर पर वार्ता की भी घोषणा की है।इसके साथ ही कई संगठनों ने देश के विभिन्न जिलों में जागरूकता अभियान और विरोध कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही है।

फंडिंग को लेकर भी उठे सवाल

दूसरी ओर, कुछ इस्लामी संगठनों और धार्मिक समूहों ने परियोजना की फंडिंग के स्रोतों की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि परियोजना के लिए धन कहां से आया और क्या इसमें किसी विदेशी संस्था या संगठन की भूमिका है।इन संगठनों ने संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की मांग भी उठाई है। हालांकि, इस संबंध में किसी सरकारी जांच के नतीजे सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

बढ़ी राजनीतिक और सामाजिक संवेदनशीलता

विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल एक निर्माण परियोजना तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता, अल्पसंख्यक अधिकारों और सामाजिक सौहार्द जैसे व्यापक मुद्दों से भी जुड़ गया है। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और जांच की दिशा इस मामले के भविष्य को तय कर सकती है।


 

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