भारत में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की योजना तेजी से आगे बढ़ रही है। कुछ वर्ष पहले तक पेट्रोल में एथेनॉल की हिस्सेदारी सीमित थी, लेकिन अब देश 20 प्रतिशत ब्लेंडिंग (E20) के लक्ष्य तक पहुंच चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे देश की तेल आयात पर निर्भरता कम हुई है और विदेशी मुद्रा की बड़ी बचत हो रही है। अब संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले वर्षों में भारत E30 यानी 30 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की दिशा में भी कदम बढ़ा सकता है।
20% ब्लेंडिंग के लिए 1,200 करोड़ लीटर एथेनॉल की जरूरत
एमके ग्लोबल की रिपोर्ट के अनुसार, देश में 20 प्रतिशत एथेनॉल ब्लेंडिंग बनाए रखने के लिए हर साल लगभग 1,200 करोड़ लीटर एथेनॉल की आवश्यकता होगी। वर्तमान में देश की एथेनॉल उत्पादन क्षमता करीब 2,000 करोड़ लीटर तक पहुंच चुकी है, जिससे आपूर्ति की स्थिति मजबूत मानी जा रही है।रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2025 में तेल विपणन कंपनियों ने 1,050 करोड़ लीटर एथेनॉल की मांग रखी थी, जबकि उद्योग जगत ने 1,780 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति की पेशकश की थी। इससे स्पष्ट है कि उत्पादन क्षमता मांग से अधिक हो चुकी है।
1 करोड़ टन कच्चे तेल की बचत
एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का सबसे बड़ा फायदा कच्चे तेल के आयात में कमी के रूप में सामने आया है। अनुमान है कि 20 प्रतिशत एथेनॉल ब्लेंडिंग से हर साल करीब 1 करोड़ टन कच्चे तेल की बचत हो सकती है। इससे न केवल विदेशी मुद्रा की बचत होगी, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी।
E30 पेट्रोल की तैयारी शुरू
भारत अगले 5 से 10 वर्षों में E20 से E30 पेट्रोल की ओर बढ़ सकता है। हाल ही में भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने E22, E25, E27 और E30 पेट्रोल के लिए मानक जारी किए हैं। इसे भविष्य की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि E30 को बड़े स्तर पर लागू करने के लिए वाहनों के इंजन में तकनीकी बदलाव करने होंगे। इसके अलावा एथेनॉल की आपूर्ति और वितरण व्यवस्था को भी और मजबूत बनाना होगा।
किसानों और उद्योग को मिल रहा फायदा
एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम का लाभ केवल सरकार तक सीमित नहीं है। गन्ना किसानों, अनाज उत्पादकों और डिस्टिलरी उद्योग को भी इससे बड़ा फायदा मिला है। तेल कंपनियों को एथेनॉल की आपूर्ति से किसानों की फसलों की मांग बढ़ी है, जबकि डिस्टिलरी कंपनियों को अतिरिक्त बाजार मिला है।उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, कई मामलों में एथेनॉल की बिक्री से डिस्टिलरियों को शराब उद्योग की तुलना में बेहतर आय प्राप्त हो रही है। यही कारण है कि देश में एथेनॉल उत्पादन क्षमता लगातार बढ़ रही है।
माइलेज को लेकर बनी हुई है बहस
एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा वाहन के माइलेज पर होती है। चूंकि एथेनॉल में पेट्रोल की तुलना में ऊर्जा घनत्व कम होता है, इसलिए माना जाता है कि ज्यादा एथेनॉल वाले ईंधन से माइलेज में कुछ कमी आ सकती है।हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तविक परिस्थितियों में इसका प्रभाव वाहन, इंजन तकनीक और ड्राइविंग पैटर्न पर निर्भर करता है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि एथेनॉल की एक विशेषता यह है कि वह वातावरण से नमी को अवशोषित कर लेता है, इसलिए भंडारण और वितरण के दौरान अतिरिक्त सावधानी की जरूरत होती है।