नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लाया गया महाभियोग प्रस्ताव संसद के दोनों सदनों में खारिज कर दिया गया है। राज्यसभा के सभापति और लोकसभा अध्यक्ष ने इस प्रस्ताव से जुड़े नोटिस को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। यह पहली बार था जब किसी मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ इस तरह का प्रस्ताव लाया गया था।
193 सांसदों ने किया था समर्थन
इस प्रस्ताव पर कुल 193 सांसदों के हस्ताक्षर थे, जिनमें लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63 सदस्य शामिल थे। विपक्ष की ओर से यह प्रस्ताव मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग के साथ लाया गया था।
12 मार्च को पेश हुआ था प्रस्ताव
राज्यसभा में यह प्रस्ताव 12 मार्च 2026 को पेश किया गया था। विस्तृत विचार-विमर्श और मूल्यांकन के बाद सभापति ने न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत मिली शक्तियों का उपयोग करते हुए इसे अस्वीकार कर दिया।
क्या थे आरोप
करीब 10 पेज के इस नोटिस में मुख्य चुनाव आयुक्त पर कार्यपालिका के प्रति पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने और संवैधानिक शक्तियों के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए थे। विपक्ष ने एसआईआर (Special Intensive Revision) प्रक्रिया को लेकर भी आपत्ति जताई थी और इसे मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित करने वाला बताया था।
लोकसभा अध्यक्ष ने भी ठुकराया प्रस्ताव
लोकसभा सचिवालय के अनुसार, संविधान के अनुच्छेद 324(5) और संबंधित कानूनों के तहत प्राप्त नोटिस पर सभी पहलुओं का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन करने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ने भी इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
संवैधानिक प्रक्रिया का हवाला
दोनों सदनों की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि प्रस्ताव पर विचार करते हुए सभी कानूनी और संवैधानिक प्रावधानों का पालन किया गया। इसके बाद ही इसे खारिज करने का निर्णय लिया गया।
इस फैसले के साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ लाया गया महाभियोग प्रस्ताव फिलहाल समाप्त हो गया है।