Chicken Neck Corridor Bengal Decision

‘चिकन नेक’ पर बड़ा प्रशासनिक कदम, बंगाल सरकार के फैसले से बढ़ी सुरक्षा और कनेक्टिविटी पर नई बहस

पश्चिम बंगाल में चिकन नेक कॉरिडोर से जुड़े राजमार्गों को केंद्र एजेंसियों को सौंपने के फैसले ने सुरक्षा और कनेक्टिविटी पर नई बहस छेड़ दी है। यह इलाका रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है।

‘चिकन नेक’ पर बड़ा प्रशासनिक कदम, बंगाल सरकार के फैसले से बढ़ी सुरक्षा और कनेक्टिविटी पर नई बहस

Chicken Neck

पश्चिम बंगाल में सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी ‘चिकन नेक’ को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। राज्य सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों के कई हिस्सों को केंद्र की एजेंसियों को सौंपने की मंजूरी दी है। इस कदम के बाद एक बार फिर यह संवेदनशील इलाका चर्चा में आ गया है, जो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला एकमात्र जमीनी रास्ता माना जाता है। इस फैसले को सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर बदलाव नहीं बल्कि रणनीतिक और सुरक्षा के नजरिए से भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यही कॉरिडोर भारत की लाइफलाइन के रूप में देखा जाता है।

सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर केंद्र की एजेंसियों को जिम्मेदारी

राज्य सरकार ने जिन सात हाईवे हिस्सों को केंद्र की एजेंसियों को सौंपने की मंजूरी दी है, उनमें से कई सीधे सिलीगुड़ी कॉरिडोर से होकर गुजरते हैं। यह जिम्मेदारी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और NHIDCL को दी गई है। इन हिस्सों में लंबे समय से रखरखाव और चौड़ीकरण से जुड़े काम अटके हुए थे। अब केंद्र के अधीन आने से इन परियोजनाओं में तेजी आने की संभावना जताई जा रही है। प्रशासनिक स्तर पर इसे एक ऐसा कदम माना जा रहा है जिससे सड़क नेटवर्क और रणनीतिक कनेक्टिविटी दोनों मजबूत हो सकते हैं।

क्यों रणनीतिक रूप से बेहद अहम है यह कॉरिडोर

सिलीगुड़ी कॉरिडोर लगभग 60 किलोमीटर लंबा और सबसे संकरे हिस्से में करीब 20 से 22 किलोमीटर चौड़ा इलाका है। यह नेपाल, भूटान और बांग्लादेश से घिरा हुआ है, जबकि उत्तर में चीन की सीमा नजदीक है। यह वही रास्ता है जो असम, सिक्किम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों को भारत से जोड़ता है। अगर इस क्षेत्र में किसी तरह की बाधा आती है तो पूरे पूर्वोत्तर का संपर्क देश के बाकी हिस्सों से प्रभावित हो सकता है। इसी वजह से इसे भारत का सबसे संवेदनशील भौगोलिक गलियारा माना जाता है।

सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर दोनों पर असर की उम्मीद

इस फैसले के बाद विशेषज्ञ मान रहे हैं कि सड़क चौड़ीकरण, मरम्मत और लॉजिस्टिक नेटवर्क को मजबूती मिल सकती है। NH10 और NH27 जैसे हाईवे लंबे समय से मानसून और भूस्खलन की समस्या से प्रभावित रहे हैं। इन सड़कों पर सुधार होने से न सिर्फ नागरिक आवागमन आसान होगा, बल्कि रक्षा और आपातकालीन सप्लाई चैन भी मजबूत हो सकती है। इसी क्षेत्र में बार-बार होने वाली प्राकृतिक बाधाओं के कारण सिक्किम और पहाड़ी राज्यों की कनेक्टिविटी प्रभावित होती रही है।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और रणनीतिक चर्चा

इस मुद्दे पर पहले से ही राजनीतिक बयानबाजी चलती रही है। विपक्ष का आरोप रहा है कि परियोजनाओं में देरी के कारण क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास प्रभावित हुआ। वहीं, दूसरी ओर सरकार का तर्क है कि केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय से ही इस संवेदनशील इलाके में तेज विकास संभव है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह इलाका केवल एक सड़क मार्ग नहीं बल्कि भारत की पूर्वोत्तर रणनीतिक स्थिरता की रीढ़ माना जाता है।

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