भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गुरुवार को केरल की सत्तारूढ़ कांग्रेस-नीत सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भाजपा का कहना है कि राज्य सरकार संविधान के बजाय शरिया आधारित व्यवस्था को प्राथमिकता दे रही है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब केरल के पलक्कड़ जिले में एक युवक ने ‘इस्लाम-फ्रेंडली जिम’ खोलने की घोषणा की।
भाजपा का कांग्रेस पर तीखा हमला
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि केरल में पार्टी अपने सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के दबाव में काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अब अपने राजनीतिक फैसले स्वतंत्र रूप से नहीं ले रही, बल्कि वह आईयूएमएल के प्रभाव में है।भंडारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किए गए एक वीडियो में कहा कि कांग्रेस की नीतियां कथित तौर पर तुष्टिकरण से प्रभावित हैं, जिसके चलते ऐसे निर्णयों को बढ़ावा मिल रहा है।
केरल की राजनीति में आईयूएमएल की भूमिका
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) Indian Union Muslim League केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) का प्रमुख सहयोगी दल है। राज्य विधानसभा में इसके 22 विधायक हैं और यह गठबंधन की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी मानी जाती है।भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस Indian National Congress अपने सहयोगी दल के प्रभाव में निर्णय ले रही है, जबकि कांग्रेस की ओर से इस मामले पर विस्तृत प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।
क्या है पूरा विवाद?
यह विवाद केरल के पलक्कड़ जिले के पुथुनगरम क्षेत्र में स्थित एक फिटनेस सेंटर से जुड़ा है। जिम प्रबंधन ने हाल ही में घोषणा की है कि वह अपने केंद्र को ‘इस्लाम-फ्रेंडली जिम’ के रूप में संचालित करेगा।जानकारी के अनुसार, यह जिम शरिया आधारित दिशानिर्देशों के तहत संचालित होने की बात कही जा रही है। हालांकि, प्रबंधन की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इन नियमों के तहत कौन-कौन से विशेष प्रावधान लागू होंगे।इस घोषणा के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है और विभिन्न दलों ने इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं।
राजनीतिक विवाद में बदला स्थानीय मामला
भाजपा का कहना है कि यह मामला कांग्रेस की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़ा करता है। पार्टी ने आरोप लगाया कि केरल सरकार संविधान को प्राथमिकता देने के बजाय धार्मिक आधार पर नीतिगत झुकाव दिखा रही है।भाजपा प्रवक्ता के अनुसार, इस तरह के निर्णयों से राज्य में सामाजिक संतुलन और नागरिक अधिकारों पर असर पड़ सकता है। वहीं, कांग्रेस और यूडीएफ की ओर से इस मुद्दे पर अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।फिलहाल, यह मामला केरल की राजनीति में नया विवाद बनकर उभरा है और चर्चा का विषय बना हुआ है।