Pune Murder Case New Twist

क्या 18 दिन पहले ही तय हो गई थी केतन की मौत? पुणे केस में चौंकाने वाले दावे

पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल मर्डर केस में जांच के दौरान कई नए दावे सामने आए हैं। पुलिस का कहना है कि कथित साजिश एक दिन में नहीं बनी, बल्कि कई चरणों में योजना तैयार की गई थी।

क्या 18 दिन पहले ही तय हो गई थी केतन की मौत? पुणे केस में चौंकाने वाले दावे

Pune Murder Case

पुणे में सामने आए केतन अग्रवाल मर्डर केस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है। उतनी ही घटनाक्रम की चौंकाने वाले परतें खुलती जा रही हैं। पुलिस की शुरुआती जांच में दावा किया गया है कि यह मामला अचानक हुए विवाद का नहीं, बल्कि कई दिनों तक चली कथित योजना का हिस्सा हो सकता है। जांच एजेंसियों के अनुसार, 18 जून को हुई घटना से पहले भी कुछ ऐसे घटनाक्रम सामने आए हैं, जिन्होंने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

पुलिस के मुताबिक, केतन अग्रवाल और उनकी मंगेतर सिया गोयल मई और जून के दौरान कई बार लोहगढ़ किले गए थे। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर अधिकारियों का दावा है कि इसी दौरान कथित तौर पर हत्या की योजना आकार लेने लगी। यही वजह है कि अब जांच केवल घटना वाले दिन तक सीमित नहीं है, बल्कि उससे पहले के हर कदम की पड़ताल की जा रही है।

पहाड़ी से धक्का देने की कथित योजना कैसे बनी

पुलिस जांच में दावा किया गया है कि 31 मई को लोहगढ़ किले की यात्रा के दौरान सिया गोयल ने पहली बार केतन से छुटकारा पाने का विचार बनाया। अधिकारियों के अनुसार, उस समय केतन एक खतरनाक किनारे के पास बैठा था और वहीं से कथित साजिश की शुरुआत हुई। इसके बाद सिया और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी के बीच लगातार संपर्क बना रहा। जांच एजेंसियों का कहना है कि दोनों ने आगे की रणनीति पर भी चर्चा की थी और घटना के लिए संभावित स्थान की पहचान कर ली थी।

14 जून की घटना ने बढ़ाया शक

जांच में 14 जून का घटनाक्रम भी अहम माना जा रहा है। पुलिस का दावा है कि उस दिन भी लोहगढ़ किले पर केतन को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हुई थी। हालांकि केतन बच गया। अधिकारियों के अनुसार, घटना के बाद इसे हादसा साबित करने की कोशिश की गई और सांप दिखने का कारण बताया गया। दिलचस्प बात यह है कि केतन ने घर लौटकर इस घटना को अपनी जान बचाने की कोशिश के रूप में परिवार को बताया था, जिससे उस समय किसी को संदेह नहीं हुआ।

बैकअप प्लान तक तैयार होने का दावा

पुलिस के अनुसार, जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि यदि पहाड़ी पर बनाई गई कथित योजना सफल नहीं होती, तो सड़क दुर्घटना का विकल्प भी तैयार रखा गया था। अधिकारियों का मानना है कि यह पहलू मामले को और गंभीर बनाता है क्योंकि इससे कथित साजिश की अवधि और उसकी तैयारी दोनों पर सवाल खड़े होते हैं। इसी बिंदु को ध्यान में रखकर जांच एजेंसियां डिजिटल और तकनीकी सबूतों की भी पड़ताल कर रही हैं।

पूछताछ में आमने-सामने बैठे आरोपी

मामले में गिरफ्तार सिया गोयल और चेतन चौधरी को अदालत ने पुलिस हिरासत में भेज रखा है। पुलिस ने दोनों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की है ताकि बयानों में मौजूद विरोधाभासों की जांच की जा सके। इसी क्रम में चेतन की दुकान में काम करने वाले नीरज को भी हिरासत में लिया गया है। जांचकर्ताओं को शक है कि घटना वाले दिन इस्तेमाल किए गए फोन और कॉल रिकॉर्ड इस मामले की कई अहम कड़ियां जोड़ सकते हैं।

परिवार के शक से खुली जांच की नई दिशा

इस केस में पहला बड़ा संदेह केतन के परिवार की ओर से सामने आया। घटना के बाद जब सिया परिवार से मिली तो उसके जवाब और व्यवहार ने केतन की बहन को असहज कर दिया। परिवार ने पुलिस से दोबारा संपर्क कर मामले की गहराई से जांच की मांग की। इसके बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच शुरू की, जिसने जांच को नई दिशा दे दी।

कॉल रिकॉर्ड और सीसीटीवी बने अहम कड़ी

पुलिस के अनुसार, कॉल रिकॉर्ड की जांच में सिया और चेतन के बीच लंबे समय तक लगातार संपर्क होने की जानकारी मिली है। वहीं लोहगढ़ किले के सीसीटीवी फुटेज में एक संदिग्ध युवक भी दिखाई दिया, जो कथित तौर पर घटना वाले दिन आसपास मौजूद था। जांच एजेंसियां इन दोनों पहलुओं को केस के सबसे महत्वपूर्ण सबूतों में मान रही हैं और इन्हीं के आधार पर घटनाक्रम को जोड़ने की कोशिश कर रही हैं।

शादी की तैयारियों के बीच उठे गंभीर सवाल

केतन अग्रवाल एक कारोबारी परिवार से जुड़े थे और नवंबर में उनकी शादी प्रस्तावित थी। परिवार ने शादी की तैयारियों पर करोड़ों रुपये खर्च की योजना बनाई थी। ऐसे में यह मामला केवल एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि रिश्तों, पारिवारिक दबाव और व्यक्तिगत फैसलों के जटिल पहलुओं पर भी चर्चा छेड़ रहा है। पुलिस फिलहाल सभी संभावित कारणों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ा रही है।

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