नई दिल्लीः भारतीय नौसेना के लिए 29 अक्टूबर का दिन अहम रहा। फ्रांस के राफेल मरीन (Rafale-M) लड़ाकू विमान ने पहली बार स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर INS विक्रांत पर सफल लैंडिंग की, खास बात यह रही कि विमान पहली ही कोशिश में उतर गया । यह ट्रायल भारतीय विमानवाहक पोत पर राफेल-M के इस्तेमाल की तैयारी का अहम हिस्सा है।
इस दौरान फ्रांस के एक पायलट ने विमान उड़ाया, यह पहले फ्लाइट कैंपेन का हिस्सा है जिसका मकसद भारतीय एयरक्राफ्ट कैरियर पर फ्रांस के इस लड़ाकू विमान की क्षमता और सुरक्षा को परखना है ।
राफेल-M के लिए यह लैंडिंग क्यों अहम है?
राफेल-M को फ्रांस के एयरक्राफ्ट कैरियर चार्ल्स डी गॉल के लिए बनाया गया है । वहां विमान को कैटापल्ट की मदद से उड़ाया जाता है इसके उलट INS विक्रांत और INS विक्रमादित्य में स्की-जंप रैंप से विमान उड़ान भरते हैं और उतरते समय विशेष तारों की मदद से रोके जाते हैं।
ऐसे में यह देखना जरूरी है कि राफेल-M भारतीय जहाजों की इस व्यवस्था के साथ कितनी आसानी से काम कर सकता है । इससे पहले गोवा के INS हंसा में बने खास टेस्ट सेंटर पर भी इसकी जांच की गई थी।
भारत ने खरीदे हैं 26 राफेल-M विमान
भारत ने 28 अप्रैल 2025 को फ्रांस के साथ करीब 63,000 करोड़ रुपये में 26 राफेल-M विमानों का समझौता किया था । इनमें 22 सिंगल-सीटर और 4 डबल-सीटर विमान शामिल हैं।
इनकी डिलीवरी 2028 के आखिर या 2029 की शुरुआत से शुरू होने की उम्मीद है। फिलहाल भारतीय नौसेना के एयरक्राफ्ट कैरियर पर मिग-29K लड़ाकू विमान तैनात हैं,। राफेल-M के शामिल होने से नौसेना की हवाई ताकत और समुद्र में हमले की क्षमता को मजबूती मिलेगी।