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MP-गुजरात में झटका, फिर भी फायदे में कांग्रेस! राज्यसभा चुनाव के बाद कैसे बदला सियासी गणित

राज्यसभा चुनाव में मध्य प्रदेश और गुजरात में कांग्रेस को झटका लगा। लेकिन फिर भी पार्टी फायदे में नजर आ रही है। जानिए चुनाव और उपचुनाव के बाद भाजपा और कांग्रेस का नया सियासी गणित क्या कहता है।

MP-गुजरात में झटका, फिर भी फायदे में कांग्रेस! राज्यसभा चुनाव के बाद कैसे बदला सियासी गणित

Politics News

नई दिल्ली। राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने पहली नजर में भाजपा के पक्ष में तस्वीर बनाई है। मध्य प्रदेश और गुजरात जैसी अहम सीटों पर कांग्रेस को नुकसान हुआ, जबकि एनडीए ने कई राज्यों में अपनी स्थिति मजबूत की है। इसके बावजूद राज्यसभा की कुल ताकत के लिहाज से कांग्रेस घाटे में नहीं, बल्कि फायदे में दिखाई दे रही है। वहीं, भाजपा को सीटें जीतने के बावजूद सदन में अपनी संख्या बढ़ाने में खास लाभ मिलता नहीं दिख रहा।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर राज्यसभा चुनाव के बाद भाजपा और कांग्रेस का वास्तविक फायदा-नुकसान क्या है। आइए पूरे सियासी गणित को आसान भाषा में समझते हैं।

राज्यसभा चुनाव में अब तक क्या नतीजे आए?

10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया हुई थी। इनमें से 21 सीटों के नतीजे घोषित हो चुके हैं, जबकि झारखंड की दो और मिजोरम की एक सीट पर 18 जून को मतदान होना है। अब तक घोषित नतीजों में भाजपा 12 सीटें जीत चुकी है। कांग्रेस के खाते में चार सीटें गई हैं। इसके अलावा तेलुगु देशम पार्टी (TDP) को तीन, नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) को एक और जनसेना पार्टी को एक सीट मिली है। उधर महाराष्ट्र, तमिलनाडु और ओडिशा में हुए तीन उपचुनावों में भी उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए जा चुके हैं।

भाजपा की सीटें क्यों नहीं बढ़ेंगी?

पहली नजर में भाजपा को मध्य प्रदेश और गुजरात में अतिरिक्त लाभ मिला है। लेकिन कुल संख्या का गणित कुछ और कहानी कहता है। जिन 24 सीटों पर चुनाव हुए। उनमें पहले भाजपा के 13 सदस्य थे। चुनाव के बाद पार्टी के निर्वाचित उम्मीदवारों की संख्या 12 रह गई। गुजरात और मध्य प्रदेश से एक-एक सीट का फायदा हुआ, लेकिन कर्नाटक में दो और झारखंड में संभावित एक सीट का नुकसान इस बढ़त को संतुलित कर देता है। ऐसे में राज्यसभा में भाजपा की संख्या 113 से घटकर 112 हो सकती थी, लेकिन ओडिशा उपचुनाव ने स्थिति बदल दी।

ओडिशा उपचुनाव ने भाजपा को कैसे बचाया?

ओडिशा की सीट पहले बीजू जनता दल (BJD) के पास थी। सांसद देबाशीष सामंतराय के इस्तीफे के बाद यह सीट खाली हुई थी। बाद में सामंतराय भाजपा में शामिल हो गए और भाजपा उम्मीदवार के रूप में निर्विरोध निर्वाचित हो गए। इस एक सीट ने भाजपा को संभावित नुकसान से बचा लिया। यही वजह है कि राज्यसभा में भाजपा की कुल संख्या फिलहाल 113 पर बनी रहने की संभावना है।

फिर कांग्रेस फायदे में कैसे है?

मध्य प्रदेश और गुजरात में सीटें गंवाने के बावजूद कांग्रेस का कुल गणित बेहतर नजर आ रहा है। इन 24 सीटों में कांग्रेस के चार सांसदों का कार्यकाल खत्म हो रहा था। इनमें मध्य प्रदेश से दिग्विजय सिंह, गुजरात से शक्तिसिंह गोहिल, कर्नाटक से मल्लिकार्जुन खड़गे और राजस्थान से नीरज डांगी शामिल थे। कांग्रेस को मध्य प्रदेश और गुजरात में सीट नहीं मिली। लेकिन कर्नाटक में खड़गे के साथ पवन खेड़ा और मंसूर खान की जीत ने नुकसान की भरपाई कर दी। राजस्थान से नीरज डांगी भी दोबारा राज्यसभा पहुंच गए। इसके अलावा तमिलनाडु उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार प्रवीण चक्रवर्ती निर्विरोध जीत गए। इस तरह कांग्रेस को एक अतिरिक्त सीट का फायदा मिल गया है।

झारखंड चुनाव क्यों महत्वपूर्ण है?

कांग्रेस के लिए सबसे अहम मुकाबला अब झारखंड में बचा हुआ है। यदि कांग्रेस अपने सहयोगी दलों और विधायकों को एकजुट रखने में सफल रहती है और उसका उम्मीदवार जीत जाता है, तो पार्टी को एक और सीट का फायदा होगा। ऐसी स्थिति में राज्यसभा में कांग्रेस की संख्या 29 से बढ़कर 31 तक पहुंच सकती है। अगर झारखंड में जीत नहीं भी मिलती है, तब भी तमिलनाडु उपचुनाव की वजह से कांग्रेस को एक सीट का शुद्ध लाभ मिलता दिखाई दे रहा है।

एनडीए में सबसे ज्यादा फायदा किसे?

इस चुनाव का सबसे बड़ा लाभ भाजपा को नहीं उसके सहयोगी दलों को मिला है। आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी (TDP) की राज्यसभा ताकत बढ़ी है। जिन 24 सीटों में पहले उसके पास सिर्फ एक सीट थी। अब यह संख्या बढ़कर तीन हो गई है। वहीं, पवन कल्याण की जनसेना पार्टी को भी पहली बार इस चुनाव में राज्यसभा प्रतिनिधित्व मिला है। मेघालय में एनपीपी अपनी सीट बचाने में सफल रही है। इस तरह एनडीए का कुल दायरा और मजबूत होता दिख रहा है।

18 जून के मतदान पर टिकी नजर

राज्यसभा चुनाव का अंतिम राजनीतिक असर 18 जून को साफ होगा, जब झारखंड और मिजोरम की बची हुई सीटों पर मतदान होगा। झारखंड में कांग्रेस, झामुमो और भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के बीच मुकाबला दिलचस्प माना जा रहा है। वहीं मिजोरम की सीट पर भी राजनीतिक समीकरण अंतिम तस्वीर तय करेंगे। फिलहाल के आंकड़े बताते हैं कि भाजपा अपनी मौजूदा ताकत बनाए रखने में सफल रही है, जबकि कांग्रेस झटकों के बावजूद सीटों के लिहाज से फायदे में नजर आ रही है। यही वजह है कि इस चुनाव के बाद दोनों दल अपने-अपने तरीके से नतीजों को सकारात्मक बता रहे हैं।

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