दिल्ली विश्वविद्यालय के देशबंधु कॉलेज में आयोजित ‘राष्ट्रवाक्-2026’ कार्यक्रम में राष्ट्र जागरण, संस्कृति और भारतीय दृष्टि पर केंद्रित चर्चाओं ने माहौल को वैचारिक रंग दिया। यह आयोजन सनातन लाइफ स्टाइल फाउंडेशन और प्रज्ञा प्रवाह, दिल्ली प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में किया गया, जिसमें देशभर से शिक्षाविदों, साहित्यकारों और कलाकारों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में मुख्य आकर्षण रहा प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय संयोजक जे. नंदकुमार का संबोधन, जिसमें उन्होंने संघ के विचार और उसकी भूमिका पर विस्तार से बात रखी।
‘संघ राष्ट्र के वैभव की वैचारिक धारा’
मुख्य वक्ता जे. नंदकुमार ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत के परमवैभव के लिए उद्भूत एक वैचारिक ‘वाक्’ है, जो समाज और राष्ट्र निर्माण की दिशा में कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि संघ ने अपने सौ वर्षों के सफर में चरित्र निर्माण और सामाजिक समरसता को मजबूत करने का कार्य किया है। साथ ही उन्होंने ‘पंच परिवर्तन’ जैसे कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया, जिनका उद्देश्य समाज में एकता और जागरूकता बढ़ाना बताया गया।
सांस्कृतिक विमर्श और बौद्धिक संवाद का मंच
कार्यक्रम की अध्यक्षता इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक प्रो. के. जी. सुरेश ने की। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के विकास में वैचारिक संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। वहीं ‘राष्ट्रवाक्’ पत्रिका के संपादक कमलेश कमल ने स्वागत भाषण में इसे एक राष्ट्रीय विमर्श का मंच बताया, जहां साहित्य, कला और संस्कृति पर गहन संवाद होता है। इस आयोजन में देशभर के कई विद्वानों और कलाकारों की उपस्थिति ने इसे एक बड़े सांस्कृतिक संवाद के रूप में स्थापित किया।
सम्मान और विचार सत्रों में दिखी विविधता
कार्यक्रम में साहित्य, कला और पत्रकारिता के क्षेत्र में योगदान देने वाले कई व्यक्तियों को सम्मानित भी किया गया। इसमें विभिन्न स्मृति सम्मानों के माध्यम से लेखकों और कलाकारों को सम्मान मिला। इसके साथ ही दो अलग-अलग चिंतन सत्र भी आयोजित किए गए, जिनमें स्वतंत्रता के बाद के भारतीय साहित्य, कला की अभिव्यक्ति और वैचारिक स्वतंत्रता जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

राष्ट्रीय कवि सम्मेलन
कार्यक्रम के अंत में आयोजित राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में कई कवियों ने राष्ट्र, समाज और संस्कृति पर आधारित रचनाओं का पाठ किया। इस सत्र ने पूरे आयोजन को एक भावनात्मक और सांस्कृतिक समापन दिया, जिसमें श्रोताओं ने कविताओं का भरपूर आनंद लिया।
