Sayoni Ghosh TMC Loss Impact

काबा-मदीना गाने वाली सयानी घोष को CM योगी ने पढ़वा दी हनुमान चालीसा, फिर भी ढहा TMC का किला

सयोनी घोष का काबा-मदीना वाला प्यार फिर CM योगी की एंट्री से कथित ‘सेकुलर’ छवि बनकर हनुमान चालीसा का पाठ करना। फिर भी घोष के प्रचार ने हिंदुत्व ध्रुवीकरण बढ़ाया, TMC का खेल बिगड़ा।<br/>

काबा-मदीना गाने वाली सयानी घोष को CM योगी ने पढ़वा दी हनुमान चालीसा, फिर भी ढहा TMC का किला

West Bengal Election Result

बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति को चौंका दिया। लंबे समय से सत्ता में रही TMC को इस बार जनता ने नकारते हुए साफ संदेश दिया। नतीजे सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं थे, बल्कि राजनीति की दिशा बदलने का संकेत भी थे। इस चुनाव में चुनाव प्रचारक में कई चेहरे चर्चा में रहे। लेकिन सयोनी घोष का नाम सबसे ज्यादा उभरा। एक्ट्रेस से नेता बनी सयोनी ने खुद को आक्रामक और कथित ‘सेकुलर’ छवि के साथ पेश किया। हालांकि उनका प्रचार TMC के लिए कई जगह उल्टा असर करता दिखा। और हिंदुत्व वोटर के ध्रुवीकरण की वजह बना।

सयोनी घोष का प्रचार और सीटों पर असर

सयोनी घोष ने दक्षिण 24 परगना, मदारीहाट, पुरुलिया और जलपाईगुड़ी जैसे इलाकों में सक्रिय प्रचार किया। ये वही क्षेत्र हैं जहां TMC को उम्मीद थी कि वह मजबूत प्रदर्शन करेगी। लेकिन नतीजे इसके उलट आए। इन सीटों पर BJP ने बढ़त बनाकर TMC को पीछे छोड़ दिया। इससे पार्टी के अंदर भी यह चर्चा तेज हुई कि प्रचार की दिशा कहीं गलत तो नहीं चली गई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकल मुद्दों से ज्यादा इमोशनल और प्रतीकात्मक राजनीति पर जोर देना यहां भारी पड़ा।

‘काबा-मदीना’ से बनी छवि को जनता ने नकारा

सयोनी घोष ने अपने प्रचार में कविता और गानों का इस्तेमाल किया। उन्होंने बंगाली में हृदय मा छे काबा, नयने मदीना गाया। जिसका हिंदी बोल हैं  मेरे दिल में है काबा, आंखों में मदीना। घोष ने इन गीतों को अपनी पहचान का हिस्सा बनाया। साथ ही चुनावी मंचों से मुसलमान वोटर्स को खुश करने का प्रयास किया। वहीं, लिबरल गैंग ने सयोनी घोष की तारीफ में कसीदे पढ़े। 

लिबरल समूहों ने इस अंदाज की सराहना की और उन्हें ममता बनर्जी की नई छवि के तौर पर पेश किया। सफेद सादी साड़ी और हाथ में माइक लेकर प्रचार किया। उनके इस अंदाज पर मीडिया कवरेज भी खूब मिला। लेकिन जमीनी स्तर पर यह रणनीति असरदार साबित नहीं हुई। कई मतदाताओं ने इसे स्थानीय संस्कृति से कटे हुए संदेश के तौर पर देखा।

योगी के बयान के बाद बदली राजनीतिक दिशा

चुनाव के दौरान एक रैली में CM योगी ने मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति करने वाली टीएमसी और उसकी नेता का बिना नाम लिए भरे मंच से हिंदुत्व का पाठ पढ़ा दिया। उन्होंने एक रैली में सयोनी का नाम लिए बिना सीख देते हुए कहा कि बंगाल की पहचान काबा नहीं, बल्कि मां काली है। यह बयान सीधे तौर पर सांस्कृतिक पहचान पर केंद्रित था।

इस बयान के बाद सयोनी घोष को हनुमान चालीसा का पाठ करना पड़ा। हालांकि इससे उनकी पहले बनाई गई छवि पर सवाल उठने लगे। वहीं, राजनीतिक तौर पर यह पल अहम साबित हुआ। इससे चुनावी विमर्श धार्मिक पहचान और सांस्कृतिक जड़ों की ओर शिफ्ट होता दिखा।

पुराने विवाद भी बने चुनावी मुद्दा

चुनाव के दौरान सयोनी घोष के पुराने विवाद भी सामने आए। उनकी फिल्म ‘चरित्रहीन’ को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठे। इसके अलावा शिवलिंग पर आपत्तिजनक पोस्ट का मामला भी फिर चर्चा में आया। जिसमें उन्होंने शिवलिंग पर कंडोम की फोटो लगाकर पोस्ट कर दिया। जब कथित सेकुलर छवि बनाने वालों ने उनसे इस पर सवाल किया। पर उनकी हिंदू घृणा की पोल नहीं खोली। तब भी सवाल का जवाब देते हुए सयोनी ने इसे अकाउंट हैक होने की बात कहकर खारिज किया। हैरानी तो इस बात की रही कि अकाउंट हैक करने वालों ने एक भी मुस्लिम-विरोधी पोस्ट शेयर नहीं किए। 

भले ही हिंदू घृणा दिखाने वाली सयोनी ने काबा-मदीना गाना गाकर मुस्लिम समुदाय के वोटरों को खुश करने का प्रयास किया। लेकिन इन विवादों ने उनकी छवि को प्रभावित किया और विरोधियों को हमला करने का मौका मिला। साथ ही भाजपा के पक्ष में हिंदू वोटर्स की एकजुटता बढ़ गई। कहा तो ये भी गया कि पहले से ध्रुवीकरण की ओर बढ़ चुके पश्चिम बंगाल में सायोनी के गाने ने एक नई लहर पैदा की जिसने 'भगवा आंधी' को और तेज किया। 10 साल पहले महज 3 सीट जीतने वाली भाजपा ने इस बार दोहरा शतक लगा दिया।

जनता का संदेश: पहचान और राजनीति दोनों बदलें

बंगाल के नतीजों ने साफ कर दिया कि मतदाता अब प्रतीकात्मक राजनीति से आगे बढ़कर ठोस पहचान और विकास की बात चाहते हैं। 15 साल की सत्ता के बाद TMC के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी तो थी ही, लेकिन पार्टी के भीतर की रणनीतिक गलतियां भी सामने आईं। सयोनी घोष का मामला इसी का एक उदाहरण बनकर उभरा, जहां प्रचार का अंदाज जनता की अपेक्षाओं से मेल नहीं खा पाया।

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