गैर BJP राज्यों में भी आएगा UCC?

केंद्रीय मंत्री के बयान से बढ़ी हलचल, क्या गैर BJP राज्यों में भी आएगा UCC?

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा है कि गैर भाजपा शासित राज्यों में भी जनता UCC लागू करने का दबाव बनाएगी। उत्तराखंड, गुजरात और असम में कानून लागू होने के बाद बहस तेज हो गई है।

By : स्वदेश डेस्क
केंद्रीय मंत्री के बयान से बढ़ी हलचल, क्या गैर BJP राज्यों में भी आएगा UCC?

देश में समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के ताजा बयान ने विपक्ष शासित राज्यों की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। उन्होंने कहा है कि आने वाले समय में गैर भाजपा शासित राज्यों में भी जनता खुद UCC लागू करने की मांग करेगी।

शुक्रवार को मेघवाल ने कहा कि यह मुद्दा सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि संवैधानिक सोच से जुड़ा हुआ है। खास बात यह है कि उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तराखंड, गुजरात और असम जैसे भाजपा शासित राज्य UCC कानून लागू या पारित कर चुके हैं। ऐसे में अब सवाल उठने लगा है कि क्या बाकी राज्यों पर भी दबाव बढ़ेगा?

आखिर UCC को लेकर इतना विवाद क्यों?

दरअसल, यूनिफॉर्म सिविल कोड का मतलब विवाह, तलाक, विरासत, गोद लेने और संपत्ति जैसे मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू करना है, चाहे उनका धर्म कोई भी हो। संविधान के अनुच्छेद 44 में भी राज्य को समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में प्रयास करने की बात कही गई है। हालांकि यह निर्देशक सिद्धांतों में शामिल है, इसलिए इसे अदालत में सीधे लागू नहीं कराया जा सकता। यही वजह है कि UCC को लेकर लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस जारी है। समर्थक इसे समानता की दिशा में बड़ा कदम मानते हैं, जबकि विरोधी इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़कर बताते हैं।

मेघवाल ने क्या कहा?

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर भी देश में इस तरह का कानून चाहते थे। उनके मुताबिक, संविधान निर्माण के समय भी इस विषय पर चर्चा हुई थी, लेकिन उस वक्त इसे बाद के लिए छोड़ दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि जिन राज्यों में अभी UCC लागू नहीं हुआ है, वहां की जनता अपनी सरकारों से सवाल पूछेगी। फिलहाल भाजपा शासित राज्यों में इस कानून को लेकर तेजी दिखाई दे रही है, लेकिन मेघवाल का मानना है कि भविष्य में यह मांग और राज्यों तक पहुंच सकती है।हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसे केवल राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।

किन राज्यों में लागू हो चुका है UCC?

उत्तराखंड इस साल UCC लागू करने वाला पहला राज्य बना। राज्य में विवाह, तलाक, विरासत और लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर समान नियम लागू किए गए हैं। अनुसूचित जनजातियों को इससे बाहर रखा गया है।  इसके बाद गुजरात विधानसभा ने मार्च 2026 में अपना UCC विधेयक पारित किया। वहीं असम भी हाल ही में यह कानून पास करने वाला तीसरा भाजपा शासित राज्य बन गया। इन राज्यों में बहुविवाह पर रोक, लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन और समान नागरिक नियम जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं।

विपक्ष ने क्यों उठाए सवाल?

UCC को लेकर विपक्ष के कई दलों का कहना है कि यह कानून सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता को प्रभावित कर सकता है। मेघवाल ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कुछ लोग भ्रम फैला रहे हैं कि यह कानून आदिवासी समुदायों पर भी लागू होगा, जबकि ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि आदिवासी परंपराएं  अलग विषय हैं और उन्हें छूट दी जा सकती है। 

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