कोलकाता। पश्चिम बंगाल में सत्ता बदलने के बाद बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिला है। ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के आवास के बाहर तैनात अतिरिक्त सुरक्षा हटाई गई है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब राज्य में भाजपा पहली बार सरकार में आई है। कोलकाता के कालीघाट स्थित अभिषेक बनर्जी के घर ‘शांति निकेतन 188’ के आसपास का माहौल अब पूरी तरह बदल गया है। जहां पहले भारी बैरिकेडिंग और पुलिस तैनाती रहती थी। वहीं, अब रास्ते आम लोगों के लिए खोल दिए गए हैं।
क्यों हटाई गई अतिरिक्त सुरक्षा?
राज्य के DGP सिद्धार्थ नाथ गुप्ता ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा में कोई कटौती नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को पहले की तरह Z+ श्रेणी की सुरक्षा मिलती रहेगी। दरअसल, पहले ‘येलो बुक’ प्रोटोकॉल से ज्यादा अतिरिक्त बल तैनात था, जिसे अब हटा लिया गया है। इस अतिरिक्त फोर्स को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अन्य जगहों पर लगाया जा रहा है।
पहले कैसी थी स्थिति?
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस इलाके में पहले कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रहती थी। कई पुलिस पोस्ट तैनात थे। सड़क को एक लेन तक सीमित कर दिया गया था। आने-जाने वालों की कड़ी जांच होती थी। इस वजह से आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था।
पड़ोसी क्यों मना रहे जश्न?
सुरक्षा हटने के बाद स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है। एक स्थानीय निवासी ने बताया कि अब वे बिना रोक-टोक अपने इलाके में आ-जा सकते हैं। पहले आवाजाही पर कई तरह की पाबंदियां थीं, जिससे दैनिक जीवन प्रभावित होता था। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि इलाके के विकास के लिए कोई खास काम नहीं हुआ, जबकि सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त थी।
बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 207 सीटें जीतकर पहली बार सरकार बनाई है। यह राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को भारी नुकसान हुआ, जबकि भाजपा ने रिकॉर्ड बढ़त दर्ज की। भवानीपुर सीट पर सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 15,000 से ज्यादा वोटों से हराया, जो इस चुनाव का सबसे चर्चित मुकाबला रहा।
आम लोगों पर क्या असर?
इस फैसले का सीधा असर स्थानीय लोगों पर पड़ा है। आवाजाही आसान हुई है। ट्रैफिक की समस्या कम हुई है। इलाके में सामान्य स्थिति लौटने लगी। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा प्रोटोकॉल पूरी तरह लागू है और कानून-व्यवस्था से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।