पुणे में आईटी कंपनी विप्रो की एक पूर्व महिला कर्मचारी ने कार्यस्थल पर धार्मिक उत्पीड़न और भेदभाव के गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का दावा है कि कंपनी में काम करने के दौरान उस पर इस्लाम अपनाने और एक मुस्लिम पुरुष के साथ संबंध बनाने का दबाव बनाया गया। मामले की शिकायत पुलिस तक पहुंच चुकी है और जांच शुरू हो गई है।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि हाल के दिनों में कॉर्पोरेट सेक्टर में कार्यस्थल के माहौल और कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर कई सवाल उठे हैं। ऐसे में पुणे से सामने आया यह आरोप न सिर्फ कंपनी की कार्यप्रणाली बल्कि कर्मचारियों की सुरक्षा और शिकायत निवारण व्यवस्था पर भी बहस छेड़ सकता है।
महिला ने क्या आरोप लगाए?
हिंदू जनजागृति समिति द्वारा आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला ने दावा किया कि उसकी एक महिला सहकर्मी लगातार उसकी निजी जिंदगी में दखल देती थी। आरोप है कि सहकर्मी उसे हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपनाने के लिए कहती थी और दावा करती थी कि ऐसा करने पर उसकी जिंदगी बेहतर हो जाएगी।
महिला के मुताबिक, उसे यह भी कहा गया कि यदि वह एक मुस्लिम पुरुष के साथ संबंध बनाए तो उसके लिए विदेश में अवसर बढ़ सकते हैं। पूर्व कर्मचारी का कहना है कि यह बातचीत एक-दो बार नहीं, बल्कि लंबे समय तक होती रही, जिससे वह मानसिक रूप से परेशान हो गई। दरअसल, महिला का आरोप है कि यह केवल व्यक्तिगत टिप्पणी तक सीमित नहीं था, बल्कि लगातार दबाव और मानसिक प्रताड़ना का रूप ले चुका था।
10 महीने तक उत्पीड़न सहने का दावा
पीड़िता ने दावा किया कि उसने करीब 10 महीने तक इस स्थिति का सामना किया। उसका कहना है कि उसने मामले की जानकारी कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों को भी दी थी, लेकिन उसकी शिकायत पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। महिला के अनुसार, जब उसने अपनी बात रखी तो समस्या का समाधान होने के बजाय उसके खिलाफ ही कंपनी की ओम्बड्स कमेटी में शिकायत दर्ज कर दी गई। यही सवाल अब उठ रहा है कि क्या कर्मचारी की शिकायतों को पर्याप्त गंभीरता से लिया गया था या नहीं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है।
इस्तीफा लेने का भी लगाया आरोप
पूर्व कर्मचारी ने बताया कि अगस्त 2025 में उसे एक टीम मीटिंग में बुलाया गया था। उसके मुताबिक, बैठक के दौरान उस पर इस्तीफा देने का दबाव बनाया गया और उसे अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं दिया गया। महिला का आरोप है कि परिस्थितियां ऐसी बनाई गईं कि उसे नौकरी छोड़नी पड़ी। उसने इसे जबरन इस्तीफा दिलाने की कार्रवाई बताया है। ऐसे मामलों में आमतौर पर यह देखा जाता है कि क्या कर्मचारी को निष्पक्ष सुनवाई का अवसर मिला था और क्या कंपनी की आंतरिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया था। जांच के दौरान यह पहलू भी महत्वपूर्ण रह सकता है।
पुलिस जांच और कानूनी कार्रवाई पर नजर
मामले को लेकर हिंजवडी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई है। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। वहीं, पीड़िता के वकील ने बताया है कि कंपनी को कानूनी नोटिस भी भेजा गया है और 50 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की गई है। फिलहाल, मामले में जांच एजेंसियों और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला कार्यस्थल पर धार्मिक भेदभाव और कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़ी बड़ी बहस का कारण बन सकता है।