नई दिल्लीः कांग्रेस की राजनीति में संगठनात्मक अनुशासन को लेकर युवा कांग्रेस ने बड़ा कदम उठाया है दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को हुई इंडी गठबंधन की रैली में शामिल नहीं होने पर भारतीय युवा कांग्रेस ने 215 पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया है, इनमें मध्य प्रदेश के सबसे ज्यादा 60 पदाधिकारी शामिल हैं।
यह कार्रवाई राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर की गई है। निलंबन आदेश 3 नवंबर को जारी किए गए । संगठन ने संबंधित पदाधिकारियों की अनुपस्थिति को अनुशासनहीनता माना है। निलंबन अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा ।
मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा कार्रवाई
इस कार्रवाई में मध्य प्रदेश सबसे ऊपर है, यहां 60 पदाधिकारियों को निलंबित किया गया है। इनमें 9 जिलाध्यक्ष, 5 उपाध्यक्ष, 14 महासचिव और 32 सचिव शामिल हैं। अन्य राज्यों में गुजरात के 49, झारखंड के 32, पश्चिम बंगाल के 26, तेलंगाना के 14, हिमाचल प्रदेश के 13, उत्तर प्रदेश मध्य क्षेत्र के 11 और हरियाणा के 10 पदाधिकारियों पर कार्रवाई हुई है।
परिवार में शोक और निजी कारणों का दिया हवाला
कार्रवाई के बाद कुछ पदाधिकारियों ने अपनी अनुपस्थिति के पीछे पारिवारिक और स्वास्थ्य संबंधी कारण बताए हैं । मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस के महासचिव रोहित राजोरिया ने बताया कि उनके चाचा का निधन हो गया था, उन्होंने दावा किया कि इस बारे में संगठन के वरिष्ठ नेताओं को पहले ही सूचना दे दी थी।
राजोरिया ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने 15 साल तक पार्टी के लिए काम किया। इस दौरान पार्टी के आंदोलनों में शामिल होने के कारण उनके खिलाफ 15 एफआईआर दर्ज हुईं और उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा। इसके बावजूद उन्हें अपनी बात रखने का पर्याप्त मौका नहीं दिया गया।
संगठनात्मक अनुशासन बनाम नेताओं की व्यक्तिगत मजबूरी
युवा कांग्रेस नेतृत्व ने रैली में अनुपस्थिति को संगठन के निर्देशों की अनदेखी माना है, वहीं कार्रवाई की जद में आए कुछ नेताओं का कहना है कि किसी बड़े कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाने के पीछे व्यक्तिगत परिस्थितियां भी हो सकती हैं ।अब इस कार्रवाई ने कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक अनुशासन और पदाधिकारियों की व्यक्तिगत परिस्थितियों के बीच संतुलन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।