US Iran War Deal Conditions

युद्ध रोकने को तैयार ईरान, लेकिन अमेरिका की 5 शर्तों ने बढ़ाया टकराव का खतरा

अमेरिका और इजराइल की नई सैन्य तैयारियों के बीच ईरान ने युद्ध खत्म करने की अपील की है। लेकिन दोनों देशों की सख्त शर्तों ने समझौते का रास्ता और मुश्किल बना दिया।

युद्ध रोकने को तैयार ईरान, लेकिन अमेरिका की 5 शर्तों ने बढ़ाया टकराव का खतरा

Middle East Tension

मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका और इजराइल की सैन्य गतिविधियों के बीच ईरान ने अचानक युद्ध खत्म करने की अपील की है, लेकिन साथ ही साफ कर दिया कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम पर पीछे नहीं हटेगा। सूत्रों के मुताबिक जर्मनी स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों से हथियार और गोला-बारूद लेकर कई अमेरिकी विमान इजराइल पहुंचे हैं। इस हलचल के बाद तेहरान में भी सुरक्षा और सैन्य तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

हालात ऐसे हैं कि एक तरफ बातचीत की कोशिश चल रही है। वहीं, दूसरी तरफ नए हमले की आशंका भी बढ़ती जा रही है। सबसे बड़ा विवाद दोनों देशों की उन शर्तों को लेकर है, जिन पर फिलहाल सहमति बनती नहीं दिख रही।

ट्रंप की चेतावनी ने बढ़ाया दबाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद सख्त रुख दिखाया है। उन्होंने कहा कि ईरान के पास समय बहुत कम बचा है और अगर उसने जल्द फैसला नहीं लिया तो उसके लिए कुछ भी नहीं बचेगा। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया जब इजराइल की ओर से ईरान पर नए हमलों की तैयारी की खबरें सामने आईं। अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी ईरान को लेकर आक्रामक रणनीति अपनाने का दबाव बढ़ रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन अब ऐसा समझौता चाहता है जिसे घरेलू राजनीति में 'मजबूत जीत' के रूप में पेश किया जा सके।

अमेरिका ने रखीं सख्त 5 शर्तें

ईरान के साथ किसी भी संभावित समझौते के लिए अमेरिका ने कई कठोर शर्तें रखी हैं। वॉशिंगटन चाहता है कि ईरान अपने लगभग 400 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम को सौंप दे।
अमेरिका केवल एक परमाणु संयंत्र को सीमित रूप में चलाने की अनुमति देने के पक्ष में है। साथ ही ईरान को युद्ध मुआवजे की मांग छोड़नी होगी। 
फ्रीज किए गए विदेशी खातों और संपत्तियों को लेकर भी अमेरिका नरम नहीं दिख रहा। रिपोर्ट्स के मुताबिक वॉशिंगटन ईरान की जब्त विदेशी संपत्तियों में केवल 25 प्रतिशत राशि जारी करने पर विचार कर रहा है। इसके अलावा अमेरिका चाहता है कि पूरे क्षेत्र में संघर्ष विराम तभी लागू माना जाए जब सभी वार्ताएं पूरी तरह सफल हो जाएं।

ईरान ने भी रखीं अपनी शर्तें

तेहरान ने अमेरिकी प्रस्तावों को एकतरफा बताते हुए अपनी मांगें सामने रख दी हैं। ईरान चाहता है कि मध्य पूर्व, खासकर लेबनान और आसपास के इलाकों में सैन्य कार्रवाई तुरंत रोकी जाए। ईरान ने अमेरिका से सभी आर्थिक प्रतिबंध हटाने और फ्रीज किए गए फंड पूरी तरह वापस करने की मांग की है। इसके साथ युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा भी उसकी प्रमुख शर्तों में शामिल है। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी संप्रभुता को अंतरराष्ट्रीय मान्यता देने की बात भी उठाई है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे अहम तेल व्यापार रूट्स में गिना जाता है।

फिर हमले की आशंका क्यों बढ़ रही

पश्चिम एशिया पर नजर रखने वाले कई विशेषज्ञ मान रहे हैं कि अगले 24 से 48 घंटे बेहद अहम हो सकते हैं। दोहा इंस्टीट्यूट ऑफ ग्रेजुएट स्टडीज के प्रोफेसर मोहम्मद एलमसरी ने आशंका जताई है कि अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है। उनके मुताबिक ट्रंप पर इजराइली नेतृत्व और अमेरिकी प्रशासन के सख्त रुख वाले अधिकारियों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। यही वजह है कि बातचीत के बावजूद युद्ध का खतरा टला नहीं है। एलमसरी का कहना है कि ट्रंप प्रशासन को उम्मीद थी कि ईरान जल्दी झुक जाएगा, लेकिन मौजूदा हालात अमेरिका के लिए राजनीतिक और आर्थिक चुनौती बनते जा रहे हैं।

तेल बाजार और वैश्विक राजनीति पर असर

ईरान-अमेरिका तनाव का असर सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं है। अगर होर्मुज स्ट्रेट में स्थिति बिगड़ती है तो वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ेगा। भारत समेत कई एशियाई देशों की ऊर्जा जरूरतें इस क्षेत्र से जुड़ी हैं। ऐसे में संघर्ष बढ़ने पर महंगाई और सप्लाई चेन दोनों पर दबाव बढ़ सकता है। यही कारण है कि दुनिया की बड़ी ताकतें अब इस संकट को केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता से जुड़ा मामला मानकर देख रही हैं।

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