ईरान ने एक बार फिर यूनाइटेड स्टेट्स पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भारत में ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि अमेरिका बातचीत के बजाय दबाव बनाकर अपनी शर्तें थोपना चाहता है।
अयोध्या में दिया गया बयान
अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने अयोध्या में बयान देते हुए कहा कि अमेरिका की नीयत शुरू से ही संदिग्ध रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने की बात करता है, वहीं दूसरी ओर उसी क्षेत्र में दबाव और नीतिगत रोक जैसी स्थिति पैदा करता है।
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर तनाव लगातार बना हुआ है। ईरान ने दावा किया है कि वह शांति का समर्थन करता है, लेकिन अमेरिका की नीतियां इसके विपरीत हैं। यह क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
वार्ता और संभावित बैठक
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच पीस डील को लेकर इस सप्ताह दूसरी बैठक हो सकती है। इस्लामाबाद और जेनेवा को संभावित स्थान के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले 11 अप्रैल को हुई पहली बैठक बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई थी।
युद्ध में नुकसान का दावा
ईरान सरकार की प्रवक्ता फातेमेह मोहाजेरानी ने बड़ा दावा किया है। अमेरिका और इजराइल के हमलों से देश को करीब 270 अरब डॉलर (लगभग ₹25 लाख करोड़) का नुकसान हुआ है। ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि यह आंकड़ा आगे और बढ़ सकता है।
शांति के लिए ईरान की शर्तें
ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह शांति के पक्ष में है। लेकिन उसके कुछ अहम शर्तें हैं। इनमें यूरेनियम एनरिचमेंट का अधिकार, प्रतिबंधों को हटाना और युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई शामिल है।
चीन का चार सूत्रीय शांति प्रस्ताव
मध्य पूर्व में शांति को लेकर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने चार सूत्रीय प्रस्ताव पेश किया है। बीजिंग में यूएई के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नहयान के साथ बैठक में उन्होंने क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन पर जोर दिया।
तेल टैंकर और क्षेत्रीय गतिविधियां
होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े तेल परिवहन को लेकर भी गतिविधियां तेज हैं। हाल ही में कई टैंकर इस मार्ग से गुजर चुके हैं, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।