अमेरिका और ईरान के बीच क्षेत्रीय तनाव कम करने के लिए हुई डील के बाद भी लेबनान में हालात संभलते नहीं दिख रहे हैं। दक्षिणी लेबनान में इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच फिर भारी संघर्ष हुआ, जिसमें दोनों पक्षों को नुकसान उठाना पड़ा है। रातभर चली लड़ाई में इजरायल के चार सैनिक मारे गए, जबकि ड्रोन हमले में पांच अन्य घायल हुए। दूसरी तरफ लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इजरायली हमलों में कम से कम 18 लोगों की मौत हुई है।
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच हुई समझौता प्रक्रिया को मध्य पूर्व में बड़े संघर्ष को रोकने की उम्मीद के तौर पर देखा जा रहा था। अब लेबनान का मोर्चा इस पूरी कोशिश के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
लेबनान में बढ़ी हिंसा ने रोकी बातचीत
अमेरिका-ईरान समझौते के बाद अगले चरण की बातचीत के लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का स्विट्जरलैंड दौरा प्रस्तावित था, लेकिन इसे टाल दिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक लेबनान में जारी सैन्य कार्रवाई को लेकर मतभेद बढ़ने से वार्ता प्रभावित हुई। फ्रांस ने भी अमेरिका से अपील की है कि वह इजरायल पर दबाव बनाए ताकि संघर्ष को रोका जा सके।
दक्षिणी लेबनान बना सबसे बड़ा युद्ध क्षेत्र
दक्षिणी लेबनान में इजरायली सेना और हिज्बुल्लाह के बीच भीषण टकराव हुआ। इजरायल के अनुसार हिज्बुल्लाह के हमलों में उसके चार सैनिक मारे गए और एक ड्रोन हमले में पांच जवान घायल हुए। वहीं लेबनान के अधिकारियों ने बताया कि कई इलाकों में हवाई हमलों के बाद बड़ी संख्या में लोग घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। सबसे ज्यादा असर टायर शहर के पास हारौफ गांव में देखने को मिला, जहां कई लोगों की मौत हुई और मलबे में दबे लोगों की तलाश जारी रही। अधिकारियों को आशंका है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।
इजरायल और हिज्बुल्लाह ने रखी अपनी बात
इजरायल का कहना है कि उसकी कार्रवाई हिज्बुल्लाह के ठिकानों और लड़ाकों को निशाना बनाकर की जा रही है। उसके मुताबिक संगठन लगातार संघर्ष विराम का उल्लंघन कर रहा है। दूसरी तरफ हिज्बुल्लाह ने दावा किया कि उसके लड़ाकों ने घात लगाकर हमला किया और इजरायली सैन्य वाहनों को निशाना बनाया। दोनों पक्षों के दावों के बीच आम लोगों पर सबसे बड़ा असर पड़ रहा है। सीमा क्षेत्रों से लोगों का पलायन तेज हुआ है और कई इलाकों में राहत व बचाव कार्य भी प्रभावित हुए हैं।
अमेरिका-ईरान समझौते पर मंडराया खतरा
इस डील का उद्देश्य ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करना और क्षेत्रीय मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई रोकना बताया गया था। इसमें लेबनान समेत कई संघर्ष क्षेत्रों को शामिल किया गया था। लेकिन ताजा हिंसा ने इस समझौते की स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इजरायल इस समझौते को लेकर पहले से नाराज है। उसका कहना है कि यह ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर पर्याप्त सख्त नहीं है। वहीं इजरायल के कुछ मंत्रियों ने सैनिकों की मौत के बाद बेहद आक्रामक बयान दिए हैं।
युद्ध का असर कितना बड़ा रहा
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 2 मार्च से अब तक इजरायली हमलों में हजारों लोगों की जान जा चुकी है। इनमें स्वास्थ्यकर्मी, महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। इजरायल की तरफ भी सैनिकों और नागरिकों की मौत हुई है। दक्षिणी लेबनान में अपनी सैन्य मौजूदगी को लेकर इजरायल का कहना है कि वह उत्तरी सीमा को सुरक्षित रखना चाहता है। जबकि विरोधी पक्ष इसे क्षेत्र में तनाव बढ़ाने वाला कदम बता रहा है।
तेल व्यापार और वैश्विक बाजार पर नजर
अमेरिका-ईरान समझौते के बाद ईरान पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों में राहत की बात सामने आई थी। इससे होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों की आवाजाही सामान्य होने की उम्मीद बनी। लेकिन लेबनान में बढ़ता संघर्ष अब इस पूरे क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित कर सकता है।