पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि ईरान अपने एनरिच्ड यूरेनियम का भंडार अमेरिका को सौंपने के लिए तैयार हो गया है और दोनों देशों के बीच शांति समझौता अब काफी करीब है।ट्रम्प के इस बयान ने वैश्विक स्तर पर नई बहस छेड़ दी है, हालांकि ईरान ने इन दावों को सिरे से खारिज किया है।
ट्रम्प बोले- बातचीत सफल, समझौते की संभावना ज्यादा
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि जल्द ही कोई बड़ा समझौता सामने आ सकता है।ट्रम्प के अनुसार, यदि यह डील होती है तो होर्मुज स्ट्रेट खुला रहेगा और वैश्विक तेल आपूर्ति सामान्य हो जाएगी, जिससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्था को राहत मिलेगी।
ईरान ने दावे को बताया ‘हवाई’
ट्रम्प के बयान पर ईरान की सरकारी मीडिया ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी ब्रॉडकास्टर ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति वास्तविकता से दूर बयान दे रहे हैं और उनके दावे का कोई ठोस आधार नहीं है।इस प्रतिक्रिया से साफ है कि दोनों देशों के बीच अभी भी भरोसे का संकट बना हुआ है।
इजराइल-लेबनान के बीच सीजफायर
इसी बीच अमेरिका की पहल पर इजराइल और लेबनान के बीच 10 दिन का युद्धविराम लागू हो गया है। यह सीजफायर भारतीय समयानुसार देर रात से प्रभावी हुआ।रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस समझौते का उद्देश्य स्थायी शांति वार्ता को आगे बढ़ाना है। हालांकि, युद्धविराम के बावजूद कुछ क्षेत्रों में तनाव और छिटपुट घटनाएं जारी रहने की खबरें भी सामने आई हैं।
परमाणु कार्यक्रम को लेकर बढ़ी चिंता
अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के अनुसार, ईरान के पास बड़ी मात्रा में एनरिच्ड यूरेनियम मौजूद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसे उच्च स्तर तक शुद्ध किया गया, तो परमाणु हथियार बनाने की क्षमता विकसित हो सकती है।इसी वजह से अमेरिका और उसके सहयोगी देश लंबे समय से ईरान पर परमाणु कार्यक्रम सीमित करने का दबाव बना रहे हैं।
पाकिस्तान में हो सकती है अगली बातचीत
ट्रम्प ने संकेत दिया कि अगर समझौता इस्लामाबाद में साइन होता है, तो वे पाकिस्तान की यात्रा भी कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच आमने-सामने की बातचीत फिर शुरू हो सकती है।
भारत के लिए क्यों अहम घटनाक्रम
पश्चिम एशिया में स्थिरता भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है। होर्मुज स्ट्रेट का खुला रहना और तेल आपूर्ति का सुचारू होना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है।ऐसे में अमेरिका-ईरान के बीच संभावित समझौता और क्षेत्रीय शांति भारत के हितों के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।