पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इजराइल और लेबनान के बीच चल रहे संघर्ष पर बड़ा फैसला लिया है। ट्रम्प ने दोनों देशों के बीच जारी सीजफायर को तीन हफ्तों के लिए बढ़ाने का ऐलान किया है। यह कदम क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
व्हाइट हाउस में राजनयिक स्तर की बातचीत के बाद ट्रम्प ने सोशल मीडिया के जरिए जानकारी दी कि जल्द ही इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन को बातचीत के लिए बुलाया जा सकता है।
ईरान पर ट्रम्प का स्पष्ट रुख
ईरान के साथ चल रहे तनाव को लेकर ट्रम्प ने साफ कहा कि कोई भी समझौता तभी होगा जब वह अमेरिका के हित में होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में कोई जल्दबाजी नहीं की जाएगी। सबसे अहम बयान में ट्रम्प ने कहा कि ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। उनके मुताबिक पारंपरिक सैन्य कार्रवाई से ही पर्याप्त दबाव बनाया जा चुका है।
भारत के लिए अहम संकेत
भारत सरकार ने भी मौजूदा हालात को देखते हुए अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। विदेश मंत्रालय ने लोगों को ईरान की यात्रा से बचने की सलाह दी है। सरकार के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट में स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है, हालांकि कुछ भारतीय जहाज सुरक्षित बाहर निकल चुके हैं।
भारतीय क्रू सुरक्षित
विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी कि ईरान के कब्जे में लिए गए जहाजों पर सवार सभी 22 भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं। सरकार लगातार संपर्क में है और उन्हें सुरक्षित वापस लाने के प्रयास जारी हैं।
अमेरिकी राजनीति का दबाव
विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रम्प के फैसलों के पीछे घरेलू राजनीति भी एक बड़ा कारण है। अमेरिकी कानून के तहत किसी भी युद्ध को 60 दिनों के भीतर संसद की मंजूरी जरूरी होती है। ऐसे में 1 मई से पहले ट्रम्प पर सीनेट का दबाव बढ़ सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी अपनी पार्टी के कुछ सांसद भी ईरान के खिलाफ युद्ध के विरोध में हैं।
होर्मुज में बढ़ी सैन्य गतिविधि
पेंटागन के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाने में कई महीने लग सकते हैं। इससे साफ है कि सैन्य समाधान आसान नहीं है और कूटनीतिक प्रयास ही फिलहाल प्राथमिकता बने हुए हैं।
वैश्विक असर और कूटनीतिक हल की जरूरत
मध्य पूर्व में जारी यह तनाव वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। भारत जैसे देशों के लिए भी यह स्थिति संवेदनशील है, क्योंकि इसका सीधा असर तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर पड़ता है।विशेषज्ञ मानते हैं कि सीजफायर का विस्तार एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन स्थायी शांति के लिए सभी पक्षों के बीच व्यापक संवाद जरूरी होगा।