अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के वीजा नियमों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। ट्रंप प्रशासन की ओर से छात्र वीजा व्यवस्था में संभावित बदलावों की चर्चा के बीच अमेरिकी सांसदों के एक द्विदलीय समूह ने सरकार को खुली चेतावनी दी है। सांसदों का कहना है कि अगर विदेशी छात्रों पर सख्ती बढ़ाई गई, तो इसका सीधा असर अमेरिका की अर्थव्यवस्था, टेक्नोलॉजी और रिसर्च सेक्टर पर पड़ सकता है।
वॉशिंगटन से सामने आई इस रिपोर्ट ने दुनियाभर के छात्रों, खासकर भारतीय छात्रों की चिंता बढ़ा दी है। दरअसल, अमेरिका लंबे समय से उच्च शिक्षा और रिसर्च के लिए दुनिया का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता रहा है। ऐसे में वीजा नियमों में बदलाव को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं।
आखिर क्या बदलाव करना चाहता है ट्रंप प्रशासन?
मौजूदा समय में F-1 और J-1 वीजा धारकों को “ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस” सिस्टम के तहत पढ़ाई पूरी होने तक अमेरिका में रहने की अनुमति मिलती है। लेकिन प्रस्तावित बदलाव में इसे तय चार साल की अवधि तक सीमित करने की चर्चा है।
यही सवाल अब उठ रहा है कि अगर रिसर्च या पीएचडी कोर्स चार साल से ज्यादा चला तो क्या होगा? अमेरिकी सांसदों का कहना है कि इससे छात्रों को बार-बार वीजा बढ़ाने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा, इससे न सिर्फ प्रशासनिक दबाव बढ़ेगा, बल्कि पढ़ाई और रिसर्च भी प्रभावित हो सकती है।
सांसदों ने क्यों जताई बड़ी चिंता?
अमेरिकी सांसदों ने अपने पत्र में साफ कहा कि अंतरराष्ट्रीय छात्र अमेरिका की तकनीकी बढ़त बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। खासकर STEM यानी साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स सेक्टर में विदेशी छात्रों का बड़ा योगदान माना जाता है।
सांसदों ने चेतावनी दी कि अगर विदेशी STEM ग्रेजुएट्स की संख्या में बड़ी गिरावट आती है, तो अमेरिका अपने हाई-स्किल वर्कफोर्स का 6 से 11 फीसदी हिस्सा खो सकता है। इतना ही नहीं, आने वाले वर्षों में अमेरिकी GDP को भी भारी नुकसान हो सकता है।
हालांकि प्रशासन का तर्क है कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना चाहता है। लेकिन सांसदों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय छात्र पहले से ही सबसे ज्यादा निगरानी वाले गैर-आप्रवासी समूहों में शामिल हैं।
भारतीय छात्रों पर क्या पड़ सकता है असर?
अमेरिका में पढ़ाई करने वाले विदेशी छात्रों में भारतीयों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में अगर वीजा नियम सख्त होते हैं, तो हजारों भारतीय छात्रों के लिए उच्च शिक्षा की राह मुश्किल हो सकती है।
फिलहाल कई छात्र इस बात को लेकर चिंतित हैं कि क्या भविष्य में रिसर्च प्रोग्राम या लंबे कोर्स पूरे करने में दिक्कत आएगी। वहीं शिक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर अमेरिका ज्यादा सख्ती करता है, तो छात्र कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों का रुख कर सकते हैं।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था को कितना फायदा पहुंचाते हैं विदेशी छात्र?
सांसदों ने अपने पत्र में आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय छात्र हर साल अमेरिकी अर्थव्यवस्था में करीब 43 बिलियन डॉलर का योगदान देते हैं। इसके अलावा 3.5 लाख से ज्यादा नौकरियों को भी अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन मिलता है।