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होर्मुज संकट गहराया: अमेरिका का 7 ईरानी नावें डुबोने का दावा, ट्रंप ने कहा-ईरान को धरती से मिटा देंगे 

होर्मुज में अमेरिका-ईरान टकराव गहराया। 7 नावें डुबोने के दावे और ट्रम्प की धमकी से हालात गंभीर। जानिए पूरी डिटेल, कारण और भारत पर असर।

By : स्वदेश डेस्क
होर्मुज संकट गहराया: अमेरिका का 7 ईरानी नावें डुबोने का दावा, ट्रंप ने कहा-ईरान को धरती से मिटा देंगे 

मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी नेता डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट में ईरान की 7 छोटी सैन्य नावों को डुबो दिया। ट्रम्प के मुताबिक ये नावें अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों को निशाना बना रही थीं, जिससे वैश्विक शिपिंग सुरक्षा पर खतरा पैदा हो गया था।

इस घटनाक्रम के साथ ही ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अमेरिकी जहाजों या हितों पर दोबारा हमला हुआ तो अमेरिका निर्णायक जवाब देगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के पास अब केवल दो विकल्प हैंया तो समझौता करे या फिर गंभीर सैन्य कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार रहे। इस बयान ने पहले से ही तनावपूर्ण माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

होर्मुज स्ट्रेट: दुनिया की ‘ऑयल लाइफलाइन’ पर संकट

होर्मुज स्ट्रेट केवल एक समुद्री मार्ग नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की धुरी है। यह संकरा जलमार्ग फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है, और दुनिया के कुल तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। एशिया के कई बड़े देश, जिनमें भारत, चीन और जापान शामिल हैं, अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर निर्भर हैं। ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य टकराव केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक संकट का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा।

“प्रोजेक्ट फ्रीडम” ऑपरेशन क्या है और क्यों शुरू हुआ?

अमेरिका ने हाल ही में “प्रोजेक्ट फ्रीडम” नाम से एक सैन्य अभियान शुरू किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।इस ऑपरेशन के तहत अमेरिकी नौसेना को रणनीतिक रूप से तैनात किया गया है, ताकि किसी भी संभावित हमले को रोका जा सके और फंसे हुए जहाजों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कदम वैश्विक व्यापार को बाधित होने से बचाने के लिए जरूरी था।हालांकि, ईरान इसे अपनी संप्रभुता में हस्तक्षेप मानता है और इस कारण दोनों देशों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हुई।

ईरान का रुख: नियंत्रण और संप्रभुता का सवाल

ईरान लंबे समय से यह दावा करता रहा है कि होर्मुज स्ट्रेट उसके रणनीतिक प्रभाव क्षेत्र में आता है। उसका कहना है कि इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों को उसके नियमों और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए।ईरान के अनुसार, अमेरिकी सैन्य उपस्थिति इस क्षेत्र में तनाव को बढ़ा रही है और यह उसकी सुरक्षा के लिए खतरा है। हालांकि, अमेरिका के दावे जिसमें ईरानी नावों द्वारा हमले की बात कही गई है पर ईरान ने अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, जिससे स्थिति और अस्पष्ट बनी हुई है।

24 घंटे के बड़े घटनाक्रम

पिछले 24 घंटों में कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं जो इस संघर्ष के व्यापक होने की ओर इशारा करती हैं।UAE के फुजैराह में स्थित एक पेट्रोलियम प्लांट पर ड्रोन हमला हुआ, जिससे औद्योगिक क्षेत्र में आग लग गई और कुछ लोग घायल हुए, जिनमें भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। इसके अलावा, होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे एक दक्षिण कोरियाई जहाज पर हमला होने की खबर है, जिससे उसमें आग लग गई, हालांकि किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई।इसी बीच, अमेरिका ने पहले जब्त किए गए एक ईरानी जहाज को पाकिस्तान को सौंप दिया, जिसे बाद में उसके क्रू के साथ ईरान भेजा गया। वहीं, ईरान में आंतरिक सुरक्षा के तहत तीन लोगों को फांसी दिए जाने की खबर भी सामने आई है, जिन पर विदेशी खुफिया एजेंसी से जुड़े होने का आरोप था।ये घटनाएं संकेत देती हैं कि मामला केवल समुद्री टकराव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बहुआयामी संघर्ष का रूप ले रहा है।

भारत पर असर

इस पूरे घटनाक्रम का असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। भारत जैसे देश, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर हैं, सीधे तौर पर प्रभावित हो सकते हैं।यदि होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि लगभग तय है, जिससे पेट्रोल और डीजल महंगे हो सकते हैं। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय शिपिंग महंगी होने से आयातित वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ सकती हैं।

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