सनसनीखेज खुलासा: गलवान तनाव के सात दिन बाद चीन ने किया परमाणु परीक्षण!

सनसनीखेज खुलासा: गलवान तनाव के सात दिन बाद चीन ने किया परमाणु परीक्षण!

By : Swadesh Bhopal
सनसनीखेज खुलासा: गलवान तनाव के सात दिन बाद चीन ने किया परमाणु परीक्षण!

2020 में जब पूरी दुनिया कोविड महामारी से जूझ रही थी और दूसरी ओर गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया था, उसी दौरान चीन कथित तौर पर अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देने की तैयारी में लगा हुआ था। आरोप है कि गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों की शहादत के कुछ ही दिनों बाद चीन ने गुप्त रूप से परमाणु परीक्षण किए। यह आरोप अमेरिका ने लगाए हैं।

यदि इन आरोपों को देखा जाए तो यह केवल अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है। इतना ही नहीं, ऐसे संवेदनशील समय में चीन की यह कथित गतिविधि उसकी मंशा और दीर्घकालिक रणनीति पर भी अहम सवाल खड़े करती है। अमेरिका ने बीते शुक्रवार को चीन पर यह आरोप सार्वजनिक रूप से लगाए हैं।

यह भी किया चीन ने

अमेरिका के अंडर सेक्रेटरी ऑफ स्टेट थॉमस जी. डिनैनो ने कहा है कि चीन ने गुप्त रूप से परमाणु विस्फोट परीक्षण किए, ताकि दुनिया को इसकी भनक न लगे। अमेरिका का दावा है कि चीन ने ऐसे तरीके अपनाए, जिससे भूकंप मापने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रणालियां (सीस्मिक मॉनिटरिंग) भी इन परीक्षणों को ठीक से दर्ज न कर सकें।

चीन ने इस तकनीक का किया इस्तेमाल

अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, चीन ने जिस तकनीक का इस्तेमाल किया उसे ‘डिकपलिंग’ कहा जाता है। इस तकनीक में विस्फोट को इस तरह अंजाम दिया जाता है कि उसके झटके कम महसूस हों और अंतरराष्ट्रीय निगरानी एजेंसियों को संदेह न हो। अमेरिका का कहना है कि चीन सैकड़ों टन क्षमता वाले परमाणु परीक्षणों की तैयारी कर चुका है और उन्हें अंजाम भी दे चुका है।डिनैनो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सिलसिलेवार पोस्ट में कहा कि चीन का यह कदम पूरी दुनिया के लिए खतरनाक है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा परमाणु समझौते आज की चुनौतियों से निपटने में नाकाम साबित हो रहे हैं।

कब किया था चीन ने यह परीक्षण

डिनैनो के अनुसार, 22 जून 2020 को चीन ने ऐसा ही एक परमाणु परीक्षण किया था। यह तारीख इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि यह परीक्षण गलवान घाटी में भारत-चीन के बीच हुई हिंसक झड़प के ठीक एक सप्ताह बाद हुआ था। गलवान संघर्ष में भारत के 20 जवान शहीद हुए थे, जबकि खुफिया रिपोर्टों के अनुसार 30 से अधिक चीनी सैनिक भी मारे गए थे।

सैकड़ों क्षमता वाले परमाणु परीक्षणों की तैयारी

अमेरिका का दावा है कि चीन सैकड़ों टन क्षमता के परमाणु परीक्षणों की न केवल तैयारी कर चुका है, बल्कि उन्हें गुप्त रूप से अंजाम भी दे चुका है।

ट्रंप भी दे चुके हैं बड़े संकेत

गौरतलब है कि इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी ऐसे संकेत दे चुके हैं। बीते साल अक्तूबर में उन्होंने कहा था कि यदि रूस और चीन परमाणु परीक्षण करते हैं, तो अमेरिका भी उसी स्तर पर परीक्षण शुरू कर सकता है। हालांकि, उस समय उन्होंने कोई ठोस जानकारी साझा नहीं की थी।

डिनैनो का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका न्यू स्टार्ट संधि के खत्म होने के बाद रूस और चीन के साथ तीन देशों की नई बातचीत शुरू करना चाहता है, ताकि परमाणु हथियारों पर नए सिरे से सीमाएं तय की जा सकें। हालांकि चीन ने फिलहाल ऐसी किसी भी बातचीत में शामिल होने से इनकार कर दिया है।

न्यू स्टार्ट संधि का भी जिक्र

डिनैनो ने न्यू स्टार्ट संधि का भी उल्लेख किया, जो वर्ष 2010 में अमेरिका और रूस के बीच हुई थी। इस संधि का उद्देश्य परमाणु हथियारों की संख्या को सीमित करना था। लेकिन डिनैनो के मुताबिक, 2026 तक यह संधि अप्रासंगिक हो सकती है, क्योंकि चीन तेजी से अपने परमाणु जखीरे का विस्तार कर रहा है।उन्होंने कहा कि रूस के पास बड़ी संख्या में ऐसे परमाणु हथियार हैं जो इस संधि के दायरे में नहीं आते, जबकि चीन के एक भी परमाणु हथियार पर इस संधि का कोई नियंत्रण नहीं है।

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