एम्स भोपाल की बड़ी उपलब्धि

AIIMS भोपाल की वैज्ञानिक ने रचा इतिहास, महिलाओं में कैंसर की शुरुआती जांच की नई तकनीक को मिली वैश्विक पहचान 

एम्स भोपाल की प्रो. डॉ. रश्मि चौधरी ने महिलाओं में कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए नई तकनीक विकसित की है, जिसे विश्व स्तर पर सराहना मिली है।

By : नरेंद्र कुमार
AIIMS भोपाल की वैज्ञानिक ने रचा इतिहास, महिलाओं में कैंसर की शुरुआती जांच की नई तकनीक को मिली वैश्विक पहचान 

एम्स भोपाल के जैवरसायन विभाग की प्रो. डॉ. रश्मि चौधरी ने महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए विकसित कम लागत वाली जांच तकनीक से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। उनके शोध को अमेरिका के वाशिंगटन डी.सी. में आयोजित एएसएम माइक्रोब-हेल्थ मीटिंग 2026 में वैज्ञानिकों ने सराहा। यह उपलब्धि न केवल एम्स भोपाल, बल्कि मध्यप्रदेश के चिकित्सा अनुसंधान क्षेत्र के लिए भी गौरव का विषय मानी जा रही है।

प्रो. चौधरी का यह शोध भारत सरकार के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (डीएचआर) के सहयोग से किया गया है। शोध में एचपीवी-16, एचपीवी-18, केआई-67 और पी16आईएनके4ए जैसे बायोमार्कर्स की मदद से सर्वाइकल कैंसर के जोखिम की शुरुआती अवस्था में पहचान करने की नई तकनीक विकसित की गई है। इसका उद्देश्य बीमारी का समय रहते पता लगाकर उपचार शुरू करना और महिलाओं की मृत्यु दर को कम करना है।

ग्रामीण क्षेत्रों में भी होगी आसान जांच

शोध टीम ने एक कम लागत वाला, यूएसबी से संचालित पोर्टेबल पॉइंट-ऑफ-केयर स्क्रीनिंग डिवाइस भी तैयार किया है। यह उपकरण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और संसाधन-सीमित ग्रामीण क्षेत्रों में भी सर्वाइकल कैंसर की जांच को आसान बनाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे दूरदराज की महिलाओं तक समय पर स्क्रीनिंग और उपचार की सुविधा पहुंच सकेगी।

एक साथ मिलीं दो बड़ी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियां

प्रो. डॉ. रश्मि चौधरी के इस शोध को संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) से जुड़े एएसएम जर्नल्स एसडीजी अवॉर्ड के लिए चुना गया है। इसके अलावा, जीव विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें 1 जुलाई 2026 से रॉयल सोसाइटी (एफआरएसबी) का फेलो भी नामित किया गया है। एक साथ मिली इन दो अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों ने एम्स भोपाल और प्रदेश के वैज्ञानिक समुदाय का गौरव बढ़ाया है।

 

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