मध्यप्रदेश के प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के 55 लाख से अधिक बच्चे नई गणवेश का इंतजार कर रहे हैं। सरकार इस बार राशि देने के बजाय सिलवाकर गणवेश उपलब्ध कराएगी। गणवेश का वितरण राज्य शिक्षा केंद्र करेगा, जबकि ड्रेस की टेंडर प्रक्रिया का कार्य पहली बार मध्यप्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम को सौंपा गया है।विभाग की ढिलाई के कारण अभी तक गणवेश की सिलाई की टेंडर प्रक्रिया को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। इस कारण जुलाई का आधा महीना बीत जाने के बाद भी बच्चों को गणवेश नहीं मिल सकी है।
बच्चों को मिलेगी 1 करोड़ 40 लाख 68 हजार 892 गणवेश
शिक्षा विभाग के अनुसार, सत्र 2026-27 में प्रदेश में कुल लगभग 92,695 सरकारी स्कूल हैं, जहां करीब 55 लाख बच्चों को स्कूल ड्रेस वितरित की जानी है। पिछले सप्ताह पाठ्य पुस्तक निगम ने ड्रेस सिलवाने के लिए प्री-बिड टेंडर जारी किया था, लेकिन वेंडरों की दावों-आपत्तियों के कारण टेंडर को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका। अब दोबारा टेंडर आमंत्रित किया गया है, जो जुलाई के अंत तक फाइनल होने की संभावना है।
इतनी संख्या में हैं छात्र-छात्राएं
अधिकारियों के अनुसार, पहली से तीसरी कक्षा तक 7,73,022 छात्र और 8,01,898 छात्राएं हैं। चौथी से आठवीं कक्षा तक 17,59,652 छात्र और 18,68,874 छात्राएं नामांकित हैं। इस प्रकार पहली से आठवीं तक कुल 25,32,674 छात्र और 26,70,772 छात्राएं हैं। इसके अलावा एक लाख से अधिक मदरसों के बच्चे भी इस योजना में शामिल हैं।
350 करोड़ रुपये की आएगी लागत
अधिकारियों के अनुसार, स्कूल ड्रेस की कुल लागत लगभग 350 करोड़ रुपये आएगी। हालांकि, नवंबर तक कपड़े, धागे आदि की कीमतों में वृद्धि होने से ड्रेस की लागत भी बढ़ सकती है। वेंडरों से सैंपल और कपड़े की गुणवत्ता संबंधी लैब रिपोर्ट भी मांगी गई है।चयनित वेंडर को आपूर्ति आदेश मिलने के 110 दिनों के भीतर प्रदेश में पाठ्य पुस्तक निगम के इंदौर, उज्जैन, खंडवा, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, सागर और रीवा स्थित डिपो में शत-प्रतिशत ड्रेस पहुंचानी होगी। इसके बाद राज्य शिक्षा केंद्र के माध्यम से गणवेश स्कूलों तक पहुंचाई जाएगी।तब तक बच्चे बिना नई ड्रेस के ही स्कूल आएंगे। जिन बच्चों के पास पुरानी ड्रेस है, वे उसी को पहनकर स्कूल आ रहे हैं।
प्रयास करेंगे, समय पर मिले गणवेश
आरएसके के प्रवक्ता अमिताभ अनुरागी ने माना कि तीन महीने में इतनी बड़ी मात्रा में ड्रेस तैयार करना बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य है। फिर भी हम प्रयास करेंगे कि बच्चों को समय पर गणवेश उपलब्ध कराई जा सके।