प्रमोद दुबे।
भोपाल के बड़े तालाब स्थित पूर्व से लेकर उत्तर दिशा तक, अर्थात सीहोर सीमांत क्षेत्र, नीलबड़, रातीबड़ से लेकर अन्य ग्रामीण क्षेत्रों तक, बड़े तालाब की सीमा में आने वाले डूब क्षेत्र एवं अन्य नियमों के विरुद्ध निर्मित लगभग 5000 करोड़ से अधिक की संपत्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई लगभग 6 माह पूर्व निर्धारित की गई थी तथा इन संपत्तियों को चिन्हित कर लिया गया था। उपरोक्त कार्रवाई के क्रम में आज एक बार फिर कई संपत्तियों पर बुलडोजर चलाते हुए प्रशासन की मुहिम जारी रही। टीटी नगर प्रशासन के नेतृत्व में एसडीएम अर्चना शर्मा एवं तहसीलदार कुणाल रावत ने राजस्व टीम के साथ कई संपत्तियों की बाउंड्री वॉल को ध्वस्त किया।
सेवनिया, गोरा गांव तालाब क्षेत्र में हुई कार्रवाई
एनजीटी के निर्देशों के क्रम में बड़े तालाब क्षेत्र के अंतर्गत पिछले 10 वर्षों में हुए अतिक्रमण एवं डूब क्षेत्र में कब्जों को लेकर चिन्हित 347 अतिक्रमणों के अंतर्गत आज सेवनिया एवं गोरा गांव तालाब क्षेत्र के किनारे प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सुबह से प्रारंभ हुई। चिन्हित अतिक्रमणों में बिशनखेड़ी सहित आसपास के कई गांव शामिल हैं, जो बैरागढ़ क्षेत्र तक विस्तृत हैं। टीटी नगर एसडीएम अर्चना शर्मा ने स्वदेश को बताया कि यह कार्रवाई लगातार जारी है तथा 12 अप्रैल से लगभग 25 अप्रैल तक अभियान संचालित किया जाएगा। इस दौरान शासकीय एवं निजी भूमि से अतिक्रमण हटाने के साथ-साथ मैरिज गार्डन तथा डूब क्षेत्र एवं ग्रीन बेल्ट के नियमों के विरुद्ध किए गए निर्माणों को भी हटाया जाएगा। जिला प्रशासन को इन्हें इसी माह हटाने के निर्देश प्राप्त हुए हैं। आज की कार्रवाई में लगभग एक दर्जन से अधिक अतिक्रमणों को तोड़ा गया।
5000 करोड़ से अधिक की संपत्तियों पर अतिक्रमण, शासकीय भूमि भी शामिल
बड़े तालाब के चारों ओर लगभग 50 किलोमीटर के क्षेत्र में, नीलबड़ से लेकर रातीबड़ के पूर्वी क्षेत्र एवं बैरागढ़ क्षेत्र के तालाब किनारे स्थित मैरिज गार्डन सहित अन्य क्षेत्रों में लगभग 10 वर्षों से अतिक्रमण बना हुआ है। इन अतिक्रमणों में शासकीय भूमि सहित अन्य संपत्तियों की राजस्व कीमत 5000 करोड़ से अधिक बताई जाती है। एनजीटी के दिशा-निर्देशों एवं वन विभाग सहित संबंधित विभागों के निर्देशों के क्रम में इन अतिक्रमणों को हटाने का अभियान पिछले कई वर्षों से जारी है, किंतु अब तक पूर्ण रूप से सफल नहीं हो सका है। वर्ष 2018 से 2026 तक प्रशासन द्वारा मात्र 23 प्रतिशत अतिक्रमणों पर ही कार्रवाई हो पाई है, तथा कई स्थानों पर एक वर्ष के भीतर पुनः निर्माण भी हो गया।
वर्ष 2026 में प्राप्त नवीन दिशा-निर्देशों के अनुसार, मामला सर्वोच्च न्यायालय एवं National Green Tribunal तक पहुंच चुका है, तब इस विषय में कार्रवाई को और अधिक गति दी गई है। जानकारी के अनुसार, इस अतिक्रमण के दायरे में मध्य प्रदेश के कुछ आईएएस एवं आईपीएस अधिकारियों के द्वारा भी जमीन पर अतिक्रमण से जुड़े मामलों की जानकारी भी सामने आई है।