भोपाल। शहर में जनगणना शुरू हो चुकी है। बीते पांच दिनों में प्रगणनों की ऑनलाइन एंट्री में करीबन डेढ़ लाख ऐसे फर्जी गरीब राशन कार्डधारी मिले हैं, जो राशन ले रहे हैं। दरअसल गलत तरीके से दस्तावेज तैयार कर गरीबी रेखा में शामिल इन फर्जी गरीबों की पहचान जनगणना अभियान में सामने आ ही है। गरीबी रेखा से नीचे कार्ड बनवाने के बाद ये लोग अच्छे खासे घरों में रहकर कार- बाइक, एसी समेत अच्छा जीवन जी रहे हैं। साथ में ये परिवार गरीबों के हिस्से की सुविधा लूट रहे हैं।
इस बात का खुलासा जनगणना अभियान के दौरान होने वाले मकान सर्वे के काम में हुआ है। ऐसे फर्जी कार्डधारियों की पहचान कर विशेष सूची में शामिल किया जा रहा है। बता दें कि राजधानी के 85 वार्डों में इन फर्जी कार्डधारियों की सर्वे के दौरान पहचान सामने आया है। जनगणना शुरू होने से पहले नगर निगम ने भी चार अंकों से घरों के सामने लाल मार्कर से नबंरिग की है। इस दौरान मौजूद कच्चे और पक्के मकान की मैपिंग में गरीबी रेखा से नीचे की श्रेणी के मकानों को चिन्हित किया जा रहा है।
गरीबी रेखा में शामिल है डेढ़ लाख पक्के मकान
अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक सर्वे में शहर में डेढ़ लाख अच्छे और पक्के मकान मिले हैं, जिन्हें गरीबी रेखा सूची में शामिल करवा लिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि चूंकि अभी जनगणना सर्वे चल रहा है। 30 मई के बाद भोपाल शहर के वास्तविक फर्जी राशनकार्ड धारकों की जानकारी मिलेगी। इसके बाद इन्हें सिस्टम से बाहर करने से पहले एक बार सुनवाई का मौका दिया जाएगा। यदि यह परिवार अपनी बात साबित करने में असफल होते हैं, तो उन्हें सूची से बाहर कर कार्ड को निरस्त कर दिया जाएगा।
इनका कहना है..
भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा के अनुसार, जनगणना के तहत कई जानकारियां सामने आएगी। इसमें घर, उसकी स्थिति, परिवार, कमाई सब पता चलेगा। इसका उपयोग योजना बनाने और फर्जी लाभार्थियों को हटाने में होगा।