Bhopal Holi Market Make in India Trend

होली बाजार में बदली तस्वीर: चीन का रंग फीका, ‘मेक इन इंडिया’ हुआ गाढ़ा

भोपाल में होली बाजार में बड़ा बदलाव, चीन का हिस्सा घटा और मेक इन इंडिया का रंग चढ़ा। हर्बल गुलाल और स्वदेशी पिचकारी की मांग 30-40% बढ़ी।

By : Admin
होली बाजार में बदली तस्वीर: चीन का रंग फीका, ‘मेक इन इंडिया’ हुआ गाढ़ा

भोपाल। होली बस दरवाजे पर है, और शहर के बाजार फिर से गुलाबी, पीले, हरे रंगों में रंग चुके हैं। लेकिन इस बार रंगों के बीच एक और बदलाव साफ दिख रहा है। दुकानों पर पहले जहां “मेड इन चाइना” की भरमार रहती थी, अब वहां “मेड इन इंडिया” के बोर्ड ज्यादा नजर आ रहे हैं। व्यापारी कहते हैं कि ग्राहक भी बदल गए हैं। अब लोग खुद पूछते हैं भैया, ये सामान चीन का तो नहीं? 

बाजार में स्वदेशी का बढ़ता असर

भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री और कैट के पूर्व प्रवक्ता विवेक साहू बताते हैं कि पहले ग्राहक अनजाने में चीनी सामान ले लेते थे, पर अब जागरूकता बढ़ी है। आज लोग साफ कहते हैं, हमें स्वदेशी चाहिए। वे कहते हैं सुरक्षित, हर्बल और भारतीय प्रोडक्ट दीजिए। उनका मानना है कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान का असर अब त्योहारों के बाजार में भी दिखने लगा है। खासकर एमएसएमई और स्टार्टअप इकाइयों ने इस बार जमकर सप्लाई की है। देशभर में होली का कुल कारोबार करीब 18,000 से 22,000 करोड़ रुपये आंका जा रहा है। इसमें चीन का हिस्सा घटकर अब लगभग 3,500 से 5,000 करोड़ (करीब 18–25%) रह गया है। दस साल पहले यही हिस्सा 70–75% तक था। फर्क साफ है।

किस सामान में कितना स्वदेशी?

पिचकारी - कार्टून और टैंक मॉडल में भारत की हिस्सेदारी 60–70% तक पहुंच चुकी है। चीन का हिस्सा अब 30–40% रह गया है।

मास्क और कैरेक्टर आइटम - यहां भी भारतीय उत्पाद 60–70% तक बाजार पकड़ चुके हैं।

कलर स्प्रे और फोम- इस सेगमेंट में अभी भी चीन की कुछ पकड़ है, करीब 40–50%, लेकिन भारतीय हिस्सेदारी 50–60% तक पहुंच गई है।

पानी के गुब्बारे - 70–80% अब भारतीय हैं।

गुलाल और हर्बल रंग- यहां तो लगभग पूरा बाजार भारतीय हो चुका है, 90–100% तक।

भोपाल में क्या बदल रहा है?

राजधानी के चौक, आजाद मार्केट, इतवारा, मारवाड़ी रोड, लोहा बाजार, 10 नंबर, बैरागढ़ और करौद जैसे इलाकों में इस बार हर्बल गुलाल की डिमांड ज्यादा है। थोक व्यापारी सौरभ साहू और पंकज जैन बताते हैं, लोग केमिकल रंग से दूरी बना रहे हैं। खासकर बच्चों की त्वचा और पर्यावरण को ध्यान में रखकर। हर्बल गुलाल, टेसू के फूल वाला रंग, देसी पिचकारी इनकी बिक्री 30–40% तक बढ़ी है। थोड़ी-बहुत बैटरी और म्यूजिकल पिचकारी में विदेशी निर्भरता बनी हुई है, लेकिन साधारण सामान लगभग पूरा भारतीय है।

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भोपाल संभाग में अनुमानित कारोबार

  • रंग-गुलाल: 20–30 करोड़

  • पिचकारी-खिलौने: 8–10 करोड़

  • मिठाई-नमकीन: 20–25 करोड़

  • कपड़े: 10–15 करोड़

  • भांग-ठंडाई: 5–10 करोड़

  • डीजे-टेंट: 10–12 करोड़

  • किराना-डेयरी: 20–30 करोड़

  • पूजा सामग्री: 10–20 करोड़

कुल मिलाकर होली से रंग पंचमी तक 100-150 करोड़ रुपये का कारोबार होने का अनुमान है।

इस बार के रेट क्या कह रहे हैं?

गुलाल (100 ग्राम)

लोकल: ₹15–25, ब्रांडेड: ₹30–60, हर्बल: ₹50–120 और टेसू फूल रंग: ₹60–140 मिल रहे हैं

पिचकारी

छोटी: ₹20–40, मीडियम: ₹60–120, कार्टून: ₹120–250, टैंक मॉडल: ₹350–700 और मेटल गन: ₹600–1200 की मिल रही है

गुब्बारे

50 पीस पैक: ₹25–40 और 100 पीस पैक: ₹50–80 स्प्रे और फोम की कीमतें ₹80 से ₹300 तक हैं। व्यापारी मानते हैं कि इस बार केमिकल रंग कम बिक रहे हैं। सेफ और हर्बल विकल्प की मांग साफ दिख रही है। 

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