राजधानी समेत प्रदेश में अवैध रूप से चल रहीं पटाखों की सैकड़ों दुकानें और फैक्ट्रियां
प्रदेश में पटाखा बनाने वाली करीब दो हजार फैक्ट्रियां संचालित हो रही हैं। प्रदेशभर में पटाखा फैक्ट्रियों की जांच में सामने आया है कि अधिकांश फैक्ट्रियां शहर से लगे ग्रामीण इलाकों में चल रही हैं। इनमें से ज्यादातर फैक्ट्रियां दुकानों के साथ संचालित हो रही हैं।
राजधानी भोपाल की बात करें तो भदभदा, नीलबड़, खजूरी गांव, खजूरीकलां, आदमपुर, भौंरी, बैरागढ़ और हलालपुर में अवैध पटाखा कारखाने संचालित होने की जानकारी सामने आई है। ये सभी घनी आबादी वाले आवासीय इलाके हैं, जो एक तरह से बारूद के ढेर पर बसे हुए हैं।इसके अलावा राजधानी के चौक बाजार क्षेत्र में भी आधा दर्जन पटाखों की दुकानें हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक इन दुकानों के पीछे बने आवासीय हिस्सों में पटाखे तैयार किए जाते हैं। सरकारी एजेंसियां अब इन पर सख्ती की तैयारी कर रही हैं।
दमकल विभाग के अधिकारियों की लापरवाही उजागर
जिला प्रशासन के अधिकारियों के मुताबिक पटाखा फैक्ट्री का लाइसेंस लेने के लिए कई सुरक्षा मानकों का पालन करना जरूरी होता है। इसके लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश और सुरक्षा मानक तय किए गए हैं। हालांकि आरोप है कि नगरीय निकायों के दमकल विभाग के अधिकारी फैक्ट्रियों में सभी मानक पूरे होने की रिपोर्ट लगाकर अधिकारियों को सूचना भेज देते हैं, जबकि जमीन पर हालात अलग होते हैं। लगातार हो रहे हादसों ने दमकल, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही को उजागर कर दिया है। इतने बड़े हादसों के बाद भी संबंधित विभागों ने अब तक कोई बड़ा सबक नहीं लिया है।
कागजों में दब जाती हैं जांच रिपोर्टें
मध्यप्रदेश में हाल ही में देवास की पटाखा फैक्ट्री में हुए हादसे के बाद प्रशासन ने प्रदेशभर में अवैध पटाखा फैक्ट्रियों की जांच का दावा किया है।हालांकि सच्चाई यह है कि हर बड़ी घटना के बाद जांच समितियां तो बनाई जाती हैं, लेकिन उनकी रिपोर्ट सरकारी दफ्तरों की फाइलों में दबकर रह जाती है।बीते एक दशक में प्रदेश में पटाखा फैक्ट्रियों में आग और विस्फोट की घटनाओं में सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है। शासन मृतकों के परिजनों को मुआवजा भी दे चुका है, लेकिन अवैध रूप से संचालित फैक्ट्रियों को स्थायी रूप से बंद कराने में अब तक सफलता नहीं मिल सकी है।
जांच रिपोर्ट देने के निर्देश
भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने कहा कि देवास हादसे के बाद भोपाल जिले में भी संचालित फैक्ट्रियों की जांच शुरू कर दी गई है। कलेक्टर के अनुसार जांच में यह देखा जाएगा कि फैक्ट्रियां वैध हैं या अवैध, लाइसेंस लिया गया है या नहीं, और तय सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है या नहीं। अधिकारियों को जल्द रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
2015 से 2026 तक पटाखा फैक्ट्री हादसों की बड़ी घटनाएं
पेटलावद ब्लास्ट, 2015
12 सितंबर 2015 को झाबुआ के पेटलावद में मध्यप्रदेश के इतिहास का सबसे भीषण विस्फोट हुआ था। प्रशासन के अनुसार 79 लोगों की मौत हुई थी, जबकि प्रत्यक्षदर्शियों ने मृतकों की संख्या 150 तक बताई थी।
मुरैना हादसा, 2022
20 अक्टूबर 2022 को मुरैना की पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट में 4 लोगों की मौत और 7 लोग घायल हुए थे। बाद में पता चला कि फैक्ट्री थाने के पास अवैध रूप से संचालित हो रही थी।
हरदा ब्लास्ट, 2024
6 फरवरी 2024 को हरदा के बैरागढ़ गांव स्थित पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट में 13 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 300 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।
महू फैक्ट्री विस्फोट, 2024
16 अप्रैल 2024 को इंदौर के महू में पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट हुआ था। इसमें तीन कर्मचारी झुलस गए थे, जिनमें से एक कर्मचारी की इलाज के दौरान मौत हो गई थी।
हरपालपुर धमाका, 2024
2 अक्टूबर 2024 को छतरपुर के हरपालपुर में पटाखा फैक्ट्री में लगातार कई धमाके हुए थे। हालांकि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई थी।
मुरैना विस्फोट, 2024
19 अक्टूबर 2024 को मुरैना के इस्लामपुरा इलाके में एक मकान में बड़ा विस्फोट हुआ था। घटना में महिला और बच्ची की मौत हुई थी।
मुरैना विस्फोट, 2025
साल 2025 में मुरैना में एक घर में विस्फोट हुआ था। उस समय घर में कोई मौजूद नहीं था, इसलिए जनहानि नहीं हुई। जांच में वहां से भारी मात्रा में पटाखा सामग्री और पोटाश बरामद किया गया था।
पटाखा फैक्ट्रियों के लिए जरूरी सुरक्षा मानक
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फैक्ट्री और दुकानें आबादी से दूर हों
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आसपास के मकानों से कम से कम 100 मीटर दूरी हो
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बिजली विभाग की एनओसी अनिवार्य हो
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पर्याप्त फायर सेफ्टी उपकरण मौजूद हों
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बालू और पानी की पर्याप्त व्यवस्था हो
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आसपास तालाब या नलकूप जैसी सुविधा उपलब्ध हो
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परिसर में चाय, खाना बनाने और धूम्रपान पर प्रतिबंध हो
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गोदाम में पर्याप्त रोशनी हो
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खुली बिजली लाइनें नहीं होनी चाहिए
(दमकल विभाग के अधिकारियों के अनुसार)