भोपाल। रतनपुर से फंदा तक बनने वाले पश्चिमी बायपास रोड के निर्माण से आसपास के 29 गांवों में पेयजल संकट खड़ा हो सकता है। पर्यावरणविद् डॉ सुभाष पांडेय का कहना है कि 36 किमी लंबे इस बायपास के निर्माण में रोज करीब 4500 किलोलीटर पानी खर्च होगा। उन्होंने सरकार से इन गांवों में पीने के पानी की व्यवस्था अभी से करने की मांग की है।
सड़क बनाने में कितना पानी लगेगा
रतनपुर से फंदा तक यह सड़क 120 फीट चौड़ी बनेगी। डॉ पांडेय के मुताबिक सड़क के बेस और सब-ग्रेड के निर्माण में रोज 3000 किलोलीटर पानी लगेगा। धूल रोकने के लिए रोज 1000 किलोलीटर पानी का छिड़काव होगा और मजदूरों व कर्मचारियों की जरूरत के लिए 500 किलोलीटर पानी चाहिए। इस हिसाब से दो साल में प्रोजेक्ट पर करीब 328 करोड़ लीटर पानी खर्च होगा।
भूजल से होगी पानी की पूर्ति, कुएं और बोरिंग सूखने का डर
डॉ पांडेय ने बताया कि प्रोजेक्ट के लिए पानी भूजल से ही लिया जाएगा। अगर रोज 4500 किलोलीटर पानी जमीन से निकाला गया तो आसपास के कुएं और बोरिंग सूखने का खतरा है। फसलों पर भी असर पड़ने की आशंका है। उन्होंने कहा कि वे शहर के नागरिकों की सुविधा के लिए विकास के पक्ष में हैं, लेकिन गांवों में रहने वाले किसानों और लोगों की चिंता भी सरकार को करनी चाहिए। बायपास से लगे 29 गांवों की करीब तीन लाख आबादी के पीने के पानी का इंतजाम करना होगा।