रायपुर। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में सामने आया दोहरे हत्याकांड का मामला अदालत के फैसले के बाद फिर चर्चा में है। तंत्र-साधना और अंधविश्वास के नाम पर अपने ही परिवार के दो युवकों की हत्या करने के मामले में कोर्ट ने मां समेत चार लोगों को दोषी ठहराया है। करीब डेढ़ साल चली सुनवाई के बाद अदालत ने सभी आरोपियों को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
मामले ने यह भी दिखाया कि अंधविश्वास किस तरह एक परिवार को भीतर से तबाह कर सकता है। जांच में सामने आया कि दोनों युवक परिवार में बढ़ रही तांत्रिक गतिविधियों का विरोध कर रहे थे। यही विरोध उनकी जान का कारण बन गया।
सात दिन तक घर में चला रहस्यमयी अनुष्ठान
बाराद्वार थाना क्षेत्र के ग्राम तांदुलडीह में घटना से पहले पूरा परिवार कई दिनों तक घर के एक कमरे में बंद रहा। पड़ोसियों को अंदर से आवाजें सुनाई देती थीं, लेकिन कोई बाहर नहीं निकलता था। जब लगातार कई दिनों तक घर में असामान्य गतिविधियां जारी रहीं तो स्थानीय लोगों को संदेह हुआ। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और देखा कि घर के भीतर पूजा-पाठ, साधना और धार्मिक अनुष्ठान चल रहे थे। परिवार के सदस्य उपवास रखकर तांत्रिक क्रियाओं में जुटे हुए थे।
अचेत मिले दोनों भाई, अस्पताल में हुई मौत की पुष्टि
पुलिस जब घर के अंदर पहुंची तो विकास सिदार और विक्की सिदार अचेत अवस्था में जमीन पर पड़े मिले। दोनों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटनास्थल की परिस्थितियों और परिवार के सदस्यों के व्यवहार ने जांच एजेंसियों का संदेह और गहरा कर दिया। शुरुआती पूछताछ में भी कई विरोधाभासी बातें सामने आईं।
अंधविश्वास के विरोध ने ली जान
जांच के दौरान खुलासा हुआ कि परिवार की बड़ी बेटी कई साल पहले उज्जैन से एक कथित गुरु से दीक्षा लेकर आई थी। इसके बाद घर में तंत्र-साधना और अंधविश्वास का प्रभाव लगातार बढ़ता गया। पुलिस के अनुसार, मृतक दोनों भाई इन गतिविधियों का विरोध करते थे और परिवार को इससे दूर रहने की सलाह देते थे। आरोप है कि इसी वजह से उन्हें रास्ते से हटाने की साजिश रची गई। दोनों को विशेष पूजा और जाप के बहाने बुलाया गया और फिर उनकी हत्या कर दी गई।
जहर और गला घोंटने के मिले संकेत
मामले की जांच में सामने आया कि दोनों युवकों को पहले कीटनाशक मिला पानी पिलाया गया। इसके बाद उनकी हत्या कर दी गई। घटना को धार्मिक अनुष्ठान और साधना का रूप देकर छिपाने की कोशिश भी की गई। पुलिस ने घटनास्थल से पूजा सामग्री, हवन सामग्री, धार्मिक साहित्य, जड़ी-बूटियां, नोटबुक और कीटनाशक समेत कई अहम वस्तुएं जब्त की थीं। इन सबूतों ने जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
FSL रिपोर्ट और गवाहों ने मजबूत किया केस
अभियोजन पक्ष ने अदालत में एफएसएल रिपोर्ट, प्रत्यक्ष और परिस्थितिजन्य साक्ष्य, गवाहों के बयान तथा जांच के दौरान जुटाए गए दस्तावेज पेश किए। अदालत ने सभी साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद पाया कि आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त प्रमाण मौजूद हैं। इसी आधार पर मां फिरीतबाई सिदार, दो बहनों और एक भाई को दोहरे हत्याकांड का दोषी ठहराया गया।
फैसले ने अंधविश्वास पर फिर खड़े किए सवाल
यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि अंधविश्वास के खतरनाक प्रभाव की भी चेतावनी है। जिस परिवार में साथ रहने वाले भाई-बहन थे, वहीं तांत्रिक मान्यताओं और कट्टर विश्वासों ने रिश्तों को अपराध में बदल दिया। अदालत के फैसले के साथ यह मामला एक बार फिर इस सवाल को सामने लाया है कि अंधविश्वास और तथाकथित चमत्कारों के नाम पर समाज में फैल रही प्रवृत्तियों पर रोक लगाने के लिए जागरूकता कितनी जरूरी है।