मध्य प्रदेश की राजनीति में दतिया सीट को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली की विशेष अदालत से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। अदालत ने मामले में तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए अगली सुनवाई की तारीख 29 जुलाई तय कर दी है, इस फैसले के बाद दतिया में उपचुनाव लगभग तय माना जा रहा है राजनीतिक गलियारों में इसे कांग्रेस के लिए बड़ा झटका और भारतीय जनता पार्टी के लिए अहम अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
क्यों खत्म हुई राजेंद्र भारती की विधायकी?
जानकारी के अनुसार, भ्रष्टाचार से जुड़े एक मामले में करीब एक महीने पहले एमपी एमएलए कोर्ट ने कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 3 साल की सजा सुनाई थी जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत किसी जनप्रतिनिधि को 2 वर्ष या उससे अधिक की सजा होने पर उसकी सदस्यता समाप्त हो जाती है। इसी कानूनी प्रावधान के आधार पर मध्य प्रदेश विधानसभा ने राजेंद्र भारती की विधायकी समाप्त कर दी, इसके बाद विधानसभा सचिवालय की ओर से दतिया सीट को रिक्त घोषित किया गया और राज्य शासन द्वारा संबंधित नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया।
दिल्ली की विशेष अदालत से क्या उम्मीद थी?
राजेंद्र भारती की ओर से दिल्ली की विशेष अदालत में राहत की मांग की गई थी। उनके वकीलों को उम्मीद थी कि अदालत से ऐसा कोई अंतरिम आदेश मिल सकता है जिससे उपचुनाव की प्रक्रिया पर रोक लग सके. हालांकि अदालत ने फिलहाल कोई राहत देने से इनकार कर दिया। अब मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अदालत को प्रथम दृष्टया राहत देने योग्य आधार दिखाई देते, तो अंतरिम राहत मिल सकती थी लेकिन सुनवाई टलने और राहत न मिलने के बाद उपचुनाव की संभावना और मजबूत हो गई है।
दतिया की राजनीति में क्यों अहम है यह सीट?
दतिया विधानसभा सीट लंबे समय से मध्य प्रदेश की महत्वपूर्ण राजनीतिक सीटों में गिनी जाती है। यहां कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिलता रहा है अब यदि उपचुनाव होता है, तो यह केवल एक सीट का चुनाव नहीं होगा, बल्कि आने वाले विधानसभा समीकरणों का संकेत भी माना जाएगा। दोनों प्रमुख दलों के लिए यह प्रतिष्ठा का मुकाबला बन सकता है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगले दो वर्षों में मध्य प्रदेश की राजनीति किस दिशा में जाएगी, इसकी झलक दतिया उपचुनाव में देखने को मिल सकती है।