देवास में हुए दर्दनाक पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट मामले में प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। संभाग आयुक्त ने शनिवार को SDM संजीव सक्सेना, नायब तहसीलदार रवि शर्मा, सोनकच्छ SDOP दीपा मांडवे और टोंककला चौकी प्रभारी रमनदीप हुंडल को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई उस हादसे के बाद हुई है जिसमें अब तक 5 मजदूरों की मौत हो चुकी है और कई घायल जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।
इस मामले में सबसे अहम बात यह है कि दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के बाद प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल और तेज हो गए थे। रिपोर्ट में फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और विस्फोटक सामग्री के अनियमित भंडारण की बात सामने आई थी।
हादसे के बाद खुली प्रशासनिक लापरवाही की परतें
दरअसल, जांच में यह सामने आया कि फैक्ट्री में कम क्षमता के लाइसेंस के बावजूद बड़े पैमाने पर विस्फोटक सामग्री रखी जा रही थी। मजदूरों से बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के काम कराया जा रहा था।
यही नहीं, कई बार शिकायतों और पहले हुए हादसों के बावजूद जिम्मेदार विभागों ने समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर नियमित निरीक्षण की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारी इतने बड़े खतरे को कैसे नजरअंदाज करते रहे।
सिर्फ हादसे के बाद पहुंचे अधिकारी, पहले नहीं हुई जांच
प्रशासनिक आदेशों के अनुसार, राजस्व विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारी थी कि वे हर महीने फैक्ट्री की सुरक्षा और लाइसेंस की जांच करें। लेकिन जांच में पाया गया कि ऐसा नियमित निरीक्षण नहीं किया गया।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि अधिकारी सिर्फ हादसे के बाद मौके पर पहुंचे, जबकि पहले से सुरक्षा मानकों की अनदेखी की शिकायतें मिल रही थीं। ऐसे में यह लापरवाही पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
पांच मजदूरों की मौत के बाद सख्ती, जांच जारी
फिलहाल इस विस्फोटक हादसे में 5 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि कई मजदूर गंभीर रूप से घायल हैं। प्रशासन का कहना है कि आगे की जांच में और जिम्मेदारों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
निलंबन आदेश में साफ कहा गया है कि अधिकारियों ने निरीक्षण और सुरक्षा नियमों के पालन में गंभीर लापरवाही बरती, जिसके चलते यह बड़ा हादसा हुआ। निलंबन अवधि में सभी अधिकारियों का मुख्यालय कलेक्टर कार्यालय देवास रहेगा और उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।