इंदौर: मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर से जुड़े विवाद पर अब न्यायिक प्रक्रिया तेज हो गई है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में इस मामले की नियमित सुनवाई छह अप्रैल से शुरू हो गई है। इस सुनवाई को लेकर प्रशासन और पुलिस अलर्ट मोड पर है, जबकि पूरे प्रदेश में इस केस को लेकर गहरी निगाहें टिकी हुई हैं।
यह मामला भोजशाला के धार्मिक स्वरूप और ऐतिहासिक पहचान से जुड़ा हुआ है, जिस पर लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा है। अदालत में अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की विस्तृत रिपोर्ट प्रमुख आधार के रूप में पेश की जाएगी।
98 दिनों के वैज्ञानिक सर्वे पर आधारित रिपोर्ट
वर्ष 2024 में एएसआई की विशेषज्ञ टीम ने कोर्ट के आदेश पर भोजशाला परिसर का 98 दिनों तक वैज्ञानिक सर्वे किया था। इस दौरान आधुनिक तकनीकों जैसे ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (GPR), हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरे और सीमित खुदाई का उपयोग किया गया।
सर्वे के दौरान कई पुरातात्विक साक्ष्य, कलाकृतियां और शिलालेख सामने आए, जिन्हें एएसआई ने अपनी अंतिम रिपोर्ट में शामिल किया है। अब इसी रिपोर्ट के निष्कर्षों पर अदालत में पक्ष और विपक्ष के बीच विस्तृत बहस होगी।
अदालत में शुरू होगा अहम चरण
हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में शुरू हुई नियमित सुनवाई को इस मामले का सबसे अहम चरण माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, एएसआई की वैज्ञानिक रिपोर्ट इस विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। कोर्ट में दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क और साक्ष्य प्रस्तुत करेंगे। इसके आधार पर भोजशाला परिसर के भविष्य को लेकर निर्णय प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
प्रशासन पूरी तरह सतर्क
सुनवाई शुरू होने से पहले ही धार जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। संवेदनशीलता को देखते हुए क्षेत्र में अतिरिक्त निगरानी और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। प्रशासन का उद्देश्य किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति से बचना है, जबकि स्थानीय स्तर पर भी इस मामले को लेकर चर्चा और उत्सुकता बनी हुई है।