भारतीय ज्ञान परंपरा का मप्र मॉडल अब पड़ोसी राज्य गुजरात भी अपनाएगा। मध्यप्रदेश ऐसा इकलौता राज्य है, जिसने नई शिक्षा नीति 2020 के तहत शिक्षा में संरचनात्मक परिवर्तन करते हुए भारतीय ज्ञान और परंपरा को समावेशित किया है। जबकि गुजरात और उड़ीसा सहित अन्य राज्य भारतीय चिंतन, संस्कृति एवं परंपरागत ज्ञान को मप्र की तुलना में पाठ्यक्रमों में प्रभावी रूप से शामिल नहीं कर पाए हैं।
लिहाजा, भारतीय ज्ञान परंपरा का मप्र मॉडल अब दूसरे राज्यों के लिए भी मिसाल बन गया है। इसी कड़ी में गुजरात ने मध्यप्रदेश के इस मॉडल को अपनाने की मंशा जताई है। जानकारी के अनुसार गुजरात का एक अध्ययन दल जल्द भोपाल पहुंचेगा, जहां वह शिक्षा विभाग के अधिकारियों, शिक्षाविदों और नीति विशेषज्ञों से चर्चा कर मॉडल की कार्यप्रणाली को समझेगा।
हालांकि विभाग के उच्च अधिकारियों का कहना है कि अभी इस संबंध में कोई औपचारिक कार्यक्रम तय नहीं किया गया है, लेकिन बच्चों को भारतीय संस्कृति और परंपरागत ज्ञान से जोड़ने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।नई शिक्षा नीति के तहत राज्यों ने संरचनात्मक बदलावों पर तो ध्यान दिया, लेकिन नीति की आत्मा मानी जाने वाली भारतीय ज्ञान परंपरा को सरकार की मंशानुसार शामिल नहीं किया जा सका। वहीं मध्यप्रदेश ने इस दिशा में व्यापक कार्य किया है और उच्च शिक्षा के स्नातक पाठ्यक्रमों में इन विषयों को पढ़ाया भी जाने लगा है।स्नातक द्वितीय वर्ष के पाठ्यक्रम नए शैक्षणिक सत्र से शुरू होने जा रहे हैं। इसके बाद क्रमशः तृतीय और चतुर्थ वर्ष के पाठ्यक्रमों में भी वर्ष 2027-28 तक इन्हें शामिल किए जाने की संभावना है।
क्या है मप्र मॉडल
मध्यप्रदेश मॉडल का उद्देश्य केवल पारंपरिक विषयों को पढ़ाना नहीं, बल्कि भारतीय चिंतन और जीवन मूल्यों को आधुनिक शिक्षा प्रणाली के साथ जोड़ना है। इसी कारण पाठ्यक्रमों में भारतीय दर्शन, संस्कृति, योग, आयुर्वेद, वैदिक गणित, ज्योतिष, भारतीय भाषाओं और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को प्रमुखता से स्थान दिया गया है।इसके अलावा विद्यार्थियों को भारतीय इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के लिए विशेष गतिविधियों को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है।
उड़ीसा के लिए भी बन सकता है उदाहरण
प्रदेश के ख्यात शिक्षाविद् और मध्यप्रदेश परीक्षा एवं शुल्क नियामक आयोग के अध्यक्ष Dr. Ravindra Kanhere के मुताबिक, मध्यप्रदेश में भारतीय ज्ञान परंपरा के क्षेत्र में व्यापक कार्य हुआ है, जिसका अनुभव हाल ही में उड़ीसा दौरे के दौरान भी हुआ।वहीं राष्ट्रीय सचिव Dr. Atul Kothari भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मूल आधार भारतीय ज्ञान परंपरा को बताते हुए मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा मॉडल को अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय बता चुके हैं।