MP Guru Purnima Sandipani Parv

MP में भारत की गुरु-शिष्य परंपरा को फिर से जीवित करने की तैयारी, CM डॉ मोहन यादव ने दिए निर्देश

मध्य प्रदेश में सीएम मोहन ने गुरु पूर्णिमा के लिए एक हफ़्ते तक चलने वाले 'महर्षि सांदीपनि श्रद्धा पर्व' की घोषणा की है। प्रदेश में प्राचीन गुरु-शिष्य परंपरा को फिर से जीवित करना है।

By : उमेश सिंह
MP में भारत की गुरु-शिष्य परंपरा को फिर से जीवित करने की तैयारी, CM डॉ मोहन यादव ने दिए निर्देश

MP CM Mohan yadav Order News

भोपाल। मध्य प्रदेश इस साल गुरु पूर्णिमा को बहुत बड़े पैमाने पर मनाने की तैयारी कर रहा है। राज्य सरकार स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और सांस्कृतिक संस्थानों में एक हफ़्ते तक चलने वाला 'महर्षि सांदीपनि श्रद्धा पर्व' आयोजित करने की योजना बना रही है। इस पहल का मकसद भारत की सदियों पुरानी गुरु-शिष्य परंपरा को फिर से जीवित करना है। साथ ही इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के लक्ष्यों और देश की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों से जोड़ना है।

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने विधानसभा सचिवालय में इस उत्सव की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे गुरु पूर्णिमा को केवल एक रस्म तक सीमित न रखकर इसे एक जन-आंदोलन बनाएं। उन्होंने कहा कि भारतीय सभ्यता में शिक्षकों का स्थान हमेशा सबसे ऊंचा रहा है क्योंकि वे मानवता को अज्ञानता से ज्ञान की ओर ले जाते हैं। "गुरु" शब्द का पारंपरिक अर्थ समझाते हुए उन्होंने कहा कि 'गु' का अर्थ है अंधेरा या अज्ञानता, जबकि 'रू' का अर्थ है ज्ञान और समझ का प्रकाश।

गुरू पूर्णिमा को लेकर राज्य सरकार का फैसला

राज्य सरकार ने फैसला किया है कि सरकारी और निजी स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) और खेल, संगीत, थिएटर, पेंटिंग व अन्य कलाओं से जुड़े संस्थान इन समारोहों में सक्रिय रूप से भाग लेंगे। इस साल 29 जुलाई को पड़ने वाली गुरु पूर्णिमा के मौके पर सभी शिक्षण संस्थानों में गुरु पूजन समारोह, शिक्षक-छात्र संवाद, सांस्कृतिक कार्यक्रम, साहित्यिक आयोजन और व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे।

गुरू पूर्णिमा त्योहार तक सीमित नहीं

गुरु पूर्णिमा का सांस्कृतिक महत्व सिर्फ़ एक त्योहार तक ही सीमित नहीं है। हिंदू महीने आषाढ़ की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह त्योहार पारंपरिक रूप से महर्षि वेद व्यास को समर्पित है। उन्हें वेदों के संकलन और महाभारत की रचना का श्रेय दिया जाता है। सदियों से छात्र, विद्वान और आध्यात्मिक साधक अपने गुरुओं के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए यह दिन मनाते आ रहे हैं। हिंदू, बौद्ध और जैन परंपराओं में इस परंपरा का समान रूप से सम्मान किया जाता है, जिससे गुरु पूर्णिमा भारत के सबसे पुराने जीवित सांस्कृतिक आयोजनों में से एक बन गई है।

मध्य प्रदेश के लिए, इस त्योहार का महर्षि सांदीपनि के माध्यम से एक अतिरिक्त ऐतिहासिक संबंध भी है, जिन्हें भारतीय परंपरा में भगवान कृष्ण, बलराम और सुदामा के गुरु के रूप में सम्मानित किया जाता है। प्राचीन ग्रंथों में उज्जैन (जिसे तब अवंतिका के नाम से जाना जाता था) में स्थित उनके आश्रम का वर्णन प्राचीन भारत में शिक्षा के सबसे सम्मानित केंद्रों में से एक के रूप में किया गया है। भागवत पुराण में बताया गया है कि कृष्ण और सुदामा ने सांदीपनि के मार्गदर्शन में एक साथ शिक्षा प्राप्त की थी, जहाँ सामाजिक या आर्थिक पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना हर छात्र एक जैसा अनुशासित जीवन जीता था और एक जैसी शिक्षा प्राप्त करता था। यह कहानी लंबे समय से समानता, विनम्रता और गुरु-शिष्य के बीच आदर्श संबंध का प्रतीक रही है।

सीएम मोहन यादव ने दिए निर्देश

इस विरासत को ध्यान में रखते हुए, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे गुरु पूर्णिमा से पहले राज्य में शेष सभी सांदीपनि स्कूलों का उद्घाटन पूरा करें। उन्होंने संस्कृति विभाग से महर्षि सांदीपनि के जीवन, गुरुकुल प्रणाली और भारत की ज्ञान परंपरा में उनके योगदान पर एक पुस्तिका प्रकाशित करने को भी कहा, जिसकी प्रतियाँ राज्य भर के स्कूलों में वितरित की जाएंगी।

मुख्यमंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि स्कूलों को फ्रेंडशिप डे (मित्रता दिवस) का उपयोग छात्रों को कृष्ण और सुदामा की अटूट मित्रता से परिचित कराने के लिए करना चाहिए, और इसे केवल एक सामाजिक उत्सव के बजाय विनम्रता, निष्ठा और कृतज्ञता के पाठ के रूप में प्रस्तुत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थान ऐसे केंद्र बनने चाहिए जहाँ आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का भी अनुभव किया जा सके।

यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत एक व्यापक राष्ट्रीय प्रयास को भी दर्शाती है, जो समकालीन शिक्षा के साथ भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के एकीकरण को प्रोत्साहित करती है। यह नीति छात्रों को आधुनिक करियर के लिए तैयार करते समय भारतीय भाषाओं, शास्त्रीय ज्ञान परंपराओं, नैतिकता, कला और समग्र शिक्षा पर अधिक जोर देने का आह्वान करती है। गुरु पूर्णिमा को कक्षा की गतिविधियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और छात्रों की भागीदारी से जोड़कर, राज्य सरकार का लक्ष्य उन सिद्धांतों को व्यवहार में लाना है।

क्या बोले अतिरिक्त मुख्य सचिव

अतिरिक्त मुख्य सचिव शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि सभी सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए जा रहे हैं। जश्न की शुरुआत देवी सरस्वती को फूल अर्पित करने के साथ होगी, जिसके बाद गुरु पूजन, छात्र-शिक्षक बातचीत, लेक्चर, साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रतियोगिताएं और सामुदायिक भागीदारी जैसे कार्यक्रम होंगे। ज़्यादा भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए कई गतिविधियों का नेतृत्व खुद छात्र करेंगे।

गुरु पूर्णिमा हमेशा से ही सिर्फ़ रस्म-रिवाज़ों का त्योहार नहीं रही है। यह सीखने, आभार व्यक्त करने और गुरु-शिष्य के बीच के अटूट बंधन का उत्सव है। इसे मंदिरों और पारंपरिक गुरुकुलों से आगे ले जाकर क्लासरूम, यूनिवर्सिटी और सांस्कृतिक संस्थानों तक पहुँचाने की कोशिश के ज़रिए, मध्य प्रदेश आधुनिक पीढ़ी को भारतीय सभ्यता की सबसे पुरानी शैक्षिक परंपराओं में से एक से फिर से जोड़ने का प्रयास कर रहा है। क्या यह पहल एक स्थायी शैक्षिक आंदोलन का रूप ले पाएगी, यह अंततः केवल सरकारी कार्यक्रमों पर नहीं, बल्कि इस बात पर निर्भर करेगा कि छात्र, शिक्षक और समाज गुरु-शिष्य संबंध की भावना को कितनी गहराई से अपनाते हैं।

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