इंदौर। मध्य प्रदेश में इंदौर शहर के नवलखा इलाके में सोमवार सुबह अचानक अफरा-तफरी मच गई। जब एक के बाद एक कई बसों में आग भड़क उठी। आग इतनी तेज थी कि इसकी लपटें दूर तक दिखाई देने लगीं और आसपास के लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए।घटना तीन इमली क्षेत्र के पास उस जगह हुई, जहां निजी बसों की पार्किंग की जाती है।
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, एक बस में मरम्मत का काम चल रहा था। इसी दौरान वेल्डिंग करते समय चिंगारी से आग लगी और देखते ही देखते पांच बसें इसकी चपेट में आ गईं। मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि आग के बीच चार तेज धमाके भी हुए। कई लोगों ने दावा किया कि आवाज गैस सिलेंडर फटने जैसी थी। हालांकि प्रशासन ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
रिहायशी इलाके में खड़ी थीं 20 से ज्यादा बसें
हादसे के समय पार्किंग में 20 से ज्यादा बसें खड़ी थीं। आग फैलने के बाद वहां मौजूद लोगों ने बाकी बसों को जल्दबाजी में हटाया, ताकि नुकसान और न बढ़े। घटना स्थल के आसपास रिहायशी बस्ती होने की वजह से डर का माहौल बन गया। धुएं और धमाकों की आवाज सुनकर लोग बच्चों और परिवार के साथ बाहर निकल आए।
कई लोगों ने अपने मोबाइल से आग का वीडियो भी रिकॉर्ड किया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में लंबे समय से बसों की पार्किंग और रिपेयरिंग का काम चल रहा था, लेकिन सुरक्षा इंतजाम लगभग नहीं थे।
दमकल की टीम ने एक घंटे में पाया काबू
सूचना मिलते ही दमकल विभाग की दो गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। आग इतनी भयंकर थी कि फायर टीम को बसों के पास पहुंचने में भी दिक्कत हुई। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। पुलिस और प्रशासन की टीम ने पूरे इलाके को घेर लिया, ताकि कोई आम नागरिक आग के करीब न पहुंच सके। राहत की बात यह रही कि हादसे में किसी के घायल होने या मौत की खबर सामने नहीं आई। फिलहाल पुलिस आग लगने की असली वजह की जांच कर रही है। वेल्डिंग के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन हुआ था या नहीं, इसे भी जांच में शामिल किया गया है।
अवैध पार्किंग को लेकर फिर उठे सवाल
घटना के बाद स्थानीय पार्षद मनीष शर्मा मौके पर पहुंचे और प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि रिहायशी इलाके में निजी बसों की पार्किंग और मरम्मत को लेकर पहले भी कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। पार्षद ने मौके पर ही धरना शुरू कर दिया। उनका कहना है कि जब तक बसों को यहां से हटाने और पार्किंग व्यवस्था बदलने का फैसला नहीं होगा, तब तक विरोध जारी रहेगा। इस हादसे ने शहर में अवैध पार्किंग और सुरक्षा मानकों को लेकर फिर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। स्थानीय लोग भी अब प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।