इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में सड़क पर लगने वाले धार्मिक पंडालों को लेकर एमपी हाई कोर्ट की खंडपीठ इंदौर ने सख्त रुख दिखाया है। जयरामपुर कॉलोनी रोड पर गणेश उत्सव के दौरान सड़क पर पंडाल लगाने जाने के मामले में हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने पुलिस और प्रशासन से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने साफ कहा कि त्योहार मनाना हर समुदाय का हक है। लेकिन इसके नाम पर आम लोगों की आवाजाही नहीं रुकनी चाहिए।
मंगलवार को सुनवाई में क्या हुआ था?
मामले की सुनवाई मंगलवार को जस्टिस संदीप एन भट्ट की सिंगल बेंच में हुई। याचिका मनोज बनाम मध्य प्रदेश शासन एवं अन्य के नाम से लगी है। याचिकाकर्ता की तरफ से एडवोकेट रवींद्र मार्तंड देशपांडे ने दलील रखी। उन्होंने बताया कि जयरामपुर कॉलोनी रोड हर साल गणेश उत्सव के लिए सड़क पर ही पंडाल लगता है। इससे वहां से गुजरने वालों को दिक्कत होती है और ट्रैफिक भी प्रभावित होता है। याचिका में मांग की गई है कि सड़क पर गणेश उत्सव मनाने पर रोक लगे। साथ ही नगर निगम की पानी की टंकी के पास खाली पड़े भूखंड पर आयोजन की अनुमति देने का निर्देश दिया जाए।
याचिका पर कोर्ट ने क्या कहा
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने माना कि सड़क पर पंडाल लगने से लोगों को आने जाने में मुश्किल हो सकती है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का जुटना, सड़क किनारे वाहन खड़े वाहन और तेज आवाज में बजता संगीत भी ट्रैफिक पर असर डालते हैं। कोर्ट ने कहा कि हर समुदाय को अपने धार्मिक त्योहार मनाने का अधिकार है। पर आयोजन ऐसे हों कि जनता को बेवजह परेशानी न झेलनी पड़े।
हाई कोर्ट ने नगर निगम, पुलिस और संबंधित अधिकारियों से कहा है कि वे धार्मिक आयोजनों के लिए साफ नीति बनाने पर विचार करें। इसमें अनुमति देने की प्रक्रिया और उसकी सीमाएं तय हों। नीति में यह भी साफ किया जा सकता है कि शर्तें तोड़ने पर क्या कार्रवाई होगी और बिना अनुमति आयोजन करने पर कानून के तहत कौन से कदम उठाए जाएंगे।
चार हफ्ते में जवाब, जनहित याचिका का भी संकेत
कोर्ट ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है। अगली सुनवाई में दूसरे पक्ष को सुनने के बाद अगर उचित लगे तो मामले को जनहित याचिका के तौर पर लेने पर विचार हो सकता है। ऐसा हुआ तो सुनवाई का दायरा भी बढ़ जाएगा। यह मामला सिर्फ एक कॉलोनी के पंडाल तक सीमित नहीं दिखता। कोर्ट की टिप्पणी से सड़कों पर होने वाले सभी धार्मिक आयोजनों में आम लोगों की सुविधा ट्रैफिक व्यवस्था और अनुमति की शर्तों पर साफ नियम बनने की जरूरत सामने आई है।