इंदौर जिले के धुलेट गांव में एक महिला किसान ने पराली जलाने की प्रवृत्ति को बदलने की दिशा में मिसाल पेश की है। गांव की रहने वाली श्रीमती पपीता रावत ने न केवल किसानों को जागरूक किया, बल्कि वैकल्पिक समाधान देकर पराली जलाने पर रोक लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आजीविका मिशन से शुरू हुआ सफर
स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष श्रीमती पपीता रावत ने अपनी यात्रा आजीविका मिशन से जुड़कर शुरू की। शुरुआती आर्थिक तंगी के बीच उन्होंने सिलाई कार्य से शुरुआत की। कृषि गतिविधियों में रुचि के चलते बाद में स्वयं सहायता समूह और बैंक से ऋण लेकर स्ट्रॉ रीपर मशीन खरीदी।धुलेट गांव और आसपास के क्षेत्रों में अब कोई भी किसान अपने खेत में पराली नहीं जलाता। इसका मुख्य कारण पपीता रावत का प्रयास है। उन्होंने द्वारकाधीश सेल्फ हेल्प ग्रुप बनाया, सिलाई मशीन से काम शुरू किया और बाद में स्ट्रॉ रीपर मशीन के जरिए किसानों को पराली के विकल्प उपलब्ध कराए।
600 बीघा खेत में रोकी पराली जलाने की प्रथा
उन्होंने गांव और आसपास के किसान परिवारों को पराली जलाने के नुकसान और उससे भूसा तैयार करने के फायदे बताए। इसके परिणामस्वरूप इस वर्ष 600 बीघा से अधिक खेतों में फसल कटाई के बाद पराली जलाने से बचाया गया। साथ ही पराली से भूसा तैयार कर किसानों को आर्थिक लाभ भी पहुंचाया गया।
प्रशासन भी कर रहा प्रोत्साहित
जिला पंचायत इंदौर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सिद्धार्थ जैन ने बताया कि जिला प्रशासन और कृषि विभाग पराली नहीं जलाने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चला रहे हैं। नियमों के तहत जुर्माने का भी प्रावधान है। अधिकारियों के अनुसार, श्रीमती रावत जैसी किसान दीदियां न केवल आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि समाज और कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव भी ला रही हैं।डे आजीविका मिशन की जिला प्रबंधक गायत्री राठौड़ ने बताया कि इस समूह को विलेज ऑर्गेनाइजेशन और आस्था संकुल संगठन खुड़ैल से जोड़ा गया है, जिससे गतिविधियों को और मजबूती मिली है।
पराली जलाने से नुकसान
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है। इससे कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसें निकलती हैं, जो पर्यावरण और जलवायु पर प्रतिकूल असर डालती हैं। इसके साथ ही मिट्टी के सूक्ष्मजीव और बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं, जिससे फसल उत्पादन पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। कृषि विभाग लगातार किसानों को जागरूक कर रहा है और पराली जलाने पर जुर्माने का प्रावधान भी लागू है।