रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में एक बार फिर सुरक्षा बलों से जुड़ा बड़ा हादसा सामने आया है। अबूझमाड़ के कुतुल-कोडनार मार्ग पर ITBP जवानों का वाहन पलटने से 6 जवान घायल हो गए। इनमें दो जवानों की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना उस समय हुई जब जवान इलाके में डीमाइनिंग और सर्चिंग ऑपरेशन पर निकले थे।
हादसे के तुरंत बाद राहत टीम मौके पर पहुंची और घायलों को जिला अस्पताल भेजा गया। अबूझमाड़ लंबे समय से नक्सल गतिविधियों के कारण संवेदनशील इलाका माना जाता रहा है। ऐसे में लगातार हो रहे हादसों ने सुरक्षा अभियानों की चुनौतियों को फिर सामने ला दिया है।
डीमाइनिंग ऑपरेशन के दौरान हुआ हादसा
जानकारी के मुताबिक, ITBP की टीम शुक्रवार को सड़क मार्ग की जांच और विस्फोटक खोज अभियान पर निकली थी। इसी दौरान जवानों का वाहन अचानक अनियंत्रित होकर पलट गया। स्थानीय स्तर पर मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत रेस्क्यू शुरू किया।
घायल जवानों को प्राथमिक उपचार देने के बाद जिला अस्पताल रेफर किया गया। डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी है। अधिकारियों के मुताबिक, इलाके का रास्ता बेहद कठिन और संवेदनशील है। कई जगह सड़कें खराब हैं और लगातार सुरक्षा दबाव बना रहता है।
हालिया IED हादसे के बाद फिर बढ़ी चिंता
कुछ दिन पहले भी अबूझमाड़ इलाके में IED डिफ्यूज करने के दौरान बड़ा हादसा हुआ था। उस घटना में सुरक्षा बलों के जवानों की जान चली गई थी। विस्फोट इतना तेज था कि ऑपरेशन में शामिल टीम को संभलने का मौका तक नहीं मिला। उस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने इलाके में अलर्ट बढ़ाया था। इसके बावजूद लगातार सामने आ रहे हादसे यह दिखाते हैं कि अबूझमाड़ में ऑपरेशन अभी भी बेहद जोखिम भरे बने हुए हैं। सुरक्षा बलों के सामने चुनौती सिर्फ नक्सली हमले नहीं हैं, बल्कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियां भी ऑपरेशन को मुश्किल बनाती हैं।
विकास और सुरक्षा साथ-साथ चल रहे
अबूझमाड़ में पिछले कुछ समय से सड़क निर्माण, कैंप स्थापना और कनेक्टिविटी बढ़ाने का काम तेज हुआ है। इन्हीं परियोजनाओं की सुरक्षा के लिए ITBP और अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई है। डीमाइनिंग ऑपरेशन इसलिए जरूरी होते हैं ताकि सड़क निर्माण और जवानों की आवाजाही सुरक्षित रह सके।
नक्सली अक्सर कच्चे रास्तों और जंगल इलाकों में IED लगाकर सुरक्षा बलों को निशाना बनाने की कोशिश करते हैं। इसी वजह से हर मूवमेंट से पहले सुरक्षा जांच की जाती है। हालांकि लगातार हो रहे हादसे बताते हैं कि खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है।
बस्तर में सुरक्षा बलों पर बढ़ा दबाव
बस्तर संभाग में हाल के महीनों में सुरक्षा ऑपरेशन तेज हुए हैं। कई इलाकों में नक्सल नेटवर्क कमजोर करने के दावे किए गए हैं। लेकिन अबूझमाड़ जैसे क्षेत्रों में जोखिम अभी भी बना हुआ है। लगातार अभियान चलाने वाले जवान कठिन मौसम, खराब रास्तों और हाई रिस्क ऑपरेशन के बीच काम कर रहे हैं। ऐसे हादसे सुरक्षा बलों की जमीनी चुनौतियों की गंभीर तस्वीर सामने रखते हैं।