कानपुर। कभी आपने सोचा है कि एक साधारण मैसेज किसी की जिंदगी बदल सकता है? उत्तर प्रदेश के कानपुर से सामने आई यह कहानी सिर्फ चौंकाती नहीं, डराती भी है। यहां एक ऐसा किडनी रैकेट पकड़ा गया है, जो डिजिटल दुनिया से लेकर अस्पतालों तक फैला हुआ था—और सब कुछ बेहद संगठित तरीके से होता था।
कैसे चलता था पूरा खेल?
जांच में सामने आया कि यह रैकेट टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर सक्रिय था। यहीं डोनर और रिसीवर के बीच डील तय होती थी। किसी को पैसों का लालच, तो किसी को जिंदगी बचाने की उम्मीद। ऑपरेशन के दिन का तरीका और भी चौंकाने वाला था। अस्पताल के सामान्य स्टाफ को हटा दिया जाता, और बाहर से बुलाई गई एक 'स्पेशल टीम' सर्जरी करती।
ऑपरेशन के तुरंत बाद मरीज को अलग-अलग जगहों पर शिफ्ट कर दिया जाता, ताकि कोई सुराग न मिले। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि अस्पताल के रजिस्टर में इन ऑपरेशनों का कोई रिकॉर्ड तक नहीं होता था।
8वीं पास युवक बना ‘डॉक्टर’
इस पूरे रैकेट का मुख्य किरदार शिवम अग्रवाल उर्फ काना बताया जा रहा है। जालौन का रहने वाला यह युवक महज 8वीं पास है और पहले एंबुलेंस चलाता था। लेकिन बाद में उसने खुद को डॉक्टर के रूप में पेश करना शुरू कर दिया। गले में स्टेथोस्कोप डालकर घूमता था और लोगों का भरोसा जीत लेता था। यहीं से खेल शुरू होता था।
डिजिटल नेटवर्क और बड़े नाम
जांच में मेरठ के एक डॉक्टर अफजाल का नाम भी सामने आया है, जो टेलीग्राम के जरिए डोनर और रिसीवर के बीच सौदा तय कराता था। इसी नेटवर्क के जरिए बिहार के एक MBA छात्र को पैसों का लालच देकर किडनी डोनर बनाया गया। यह दिखाता है कि रैकेट सिर्फ लोकल नहीं, बल्कि कई राज्यों और विदेश तक फैला हुआ था।
एक केस जिसने हिला दिया
इस मामले की गंभीरता का अंदाजा पारुल तोमर के केस से लगाया जा सकता है। उन्होंने करीब 80 लाख रुपये खर्च कर किडनी ट्रांसप्लांट कराया। लेकिन ऑपरेशन के बाद संक्रमण इतना बढ़ा कि उनकी हालत बेहद गंभीर हो गई। हीमोग्लोबिन गिरकर 6.3 तक पहुंच गया और फिलहाल वे लखनऊ के SGPGI में भर्ती हैं।
पैसे का खेल कितना बड़ा?
जांच में खुलासा हुआ है कि डोनर को 6 से 10 लाख रुपये दिए जाते थे। वहीं, किडनी रिसीवर को 90 लाख रुपये से ज्यादा में बेची जाती थी। यानी एक ही ऑपरेशन में करोड़ों का खेल चल रहा था।
पुलिस की कार्रवाई
पुलिस ने इस मामले में आहूजा हॉस्पिटल से जुड़े डॉक्टर दंपति प्रीति आहूजा और सुरजीत सिंह आहूजा समेत कई लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। अब तक 6 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और कई टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। एक विदेशी महिला के ट्रांसप्लांट की जानकारी भी सामने आई है, जो इस नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की ओर इशारा करती है।
जांच जारी, कई सवाल बाकी
इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क के बाकी सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश में जुटी हैं।