भोपाल। वन्यजीवों की सुरक्षा और संभावित रेल दुर्घटनाओं को रोकने के लिए रेलवे मंत्रालय ने पश्चिम मध्य रेलवे के हिस्से में शामिल खंडवा से बीना रेल खंड तक 288 करोड़ रुपए की लागत से सुरक्षात्मक फेंसिंग यानि बाड़बंदी लगाने को मंजूरी मिल गई है। इस परियोजना को 2027 ते अंत तक पूरा कर लिया जाएगा। यह परियोजना कुल 530 किमी की दूरी को कवर करेगी। इसमें महत्वपूर्ण हिस्सा बुधनी- बरखेड़ा घाट सेक्शन भी शामिल है, जहां रातापानी अभ्यारण्य का लगभग 25 किमी हिस्सा आता है।
बता दें कि इस परियोजना को अब केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने भी हरी झंडी दे दी है। पमरे के भोपाल मंडल के अधिकारियों ने बताया कि इस परियोजना से जंगलों से गुजरने वाली रेल पटरियों पर वन्यजीवों और ट्रेनों के बीच टकराव रोकने, वन्यजीव गलियारों को सुरक्षित रखने और रेल परिचालन का सुचारू संचालन करना है, ताकि ट्रेनें विलंब ना हो और वन्य प्राणी भी सुरक्षित रहे।
15 फीट ऊंची तार फेसिंग बनेगी
अधिकारियों के अनुसार परियोजना के तहत लोहे के तार वाली करीबन 15 फीट ऊंची फेंसिंग रेलवे ट्रैक के दोनों ओर बनेगी। यह पटरी से सटे जंगलों के बीच भौतिक अवरोध का काम करेगी। इससे जंगली जानवरों और मवेशियों के अचानक रेलवे ट्रैक पर पहुंचने की आशंका कम होगी। बुधनी-बरखेड़ा के बीच का रेलखंड रातापानी वन क्षेत्र के संवेदनशील हिस्से से गुजरता है। इस क्षेत्र में रात में वन्यजीवों की रेल पटरियों पर आवाजाही लंबे समय से रेल परिचालन के लिए चुनौती बनी हुई है। अचानक ट्रैक पर जानवरों के आ जाने से ट्रेनों की गति प्रभावित होती है। विशेषकर व्यस्त और लंबी दूरी के रेल मार्गों पर इससे समय-सारणी बिगडऩे के साथ दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है। फेंसिंग लगने से वन्यजीवों की अनियंत्रित आवाजाही रोकने में मदद मिलेगी और ट्रेनों के परिचालन में होने वाली अनावश्यक देरी भी कम होगी।
पहले बनेगी बुधनी-मिडघाट-चौका-बरखेड़ा के बीच फेसिंग
तार फेसिंग परियोजना की शुरुआत सबसे पहले बुधनी-मिडघाट-चौका-बरखेड़ा कॉरिडोर पर होगा। यहां वन्यजीवों की आवाजाही के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया है। फेंसिंग और ओवरपास का निर्माण समन्वित योजना के तहत किया जाए, ताकि जानवरों की प्राकृतिक आवाजाही बाधित न हो।
अधिकारियों के अनुसार, फेंसिंग के दौरान स्थानीय परिस्थितियों और वन्यजीवों की आवाजाही के तौर-तरीकों का ध्यान रखा जाएगा। इस पहल का उद्देश्य वन्यजीवों की रक्षा के साथ यात्रियों और माल परिवहन के लिए सुरक्षित एवं भरोसेमंद रेल कॉरिडोर तैयार करना भी है।
इनका कहना है..
पमरे भोपाल के जनसंपर्क अधिकारी नवल अग्रवाल ने बताया कि बीना से खंडवा तक पष्चिम मध्य रेलवे क्षेत्र आता है। इस रेलखंड पर अभी फेसिंग नहीं होने से जानवर समेत वन्य प्राणी अचानक पटरी पर आ जाते हैं। इन्हें बचाने के लिए लोको पायलट को ब्रेक लगाना पड़ता है या ट्रेन की गति कम करनी पड़ती है। लोहे की जाली वाली तार फेसिंग बन जाने से ट्रैक और वन्यप्राणी सुरक्षित हो जाएंगे। 530 किलो मीटर लंबी इस रेलवे परियोजना को स्वीकृति मिल चुकी है।